लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं एवं संविदा कर्मियों की मौतों पर संघर्ष समिति ने जताई गहरी चिंता
हटाए गए संविदा कर्मियों की तत्काल बहाली तथा विद्युत कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने की मांग
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने भीषण गर्मी के दौरान प्रदेश में लगातार बढ़ रहे विद्युत फाल्ट, दुर्घटनाओं तथा संविदा कर्मियों की हो रही मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संघर्ष समिति का मानना है कि बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाए जाने से उत्पन्न जनशक्ति संकट ही वर्तमान गंभीर परिस्थितियों का प्रमुख कारण है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि इस वर्ष भीषण गर्मी के कारण प्रदेश में विद्युत मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है और आने वाले दिनों में यह 36,000 मेगावाट तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर, निजीकरण की प्रक्रिया के दौरान 45 प्रतिशत से अधिक संविदा कर्मियों को कार्य से अलग कर दिया गया है। साथ ही, नियमित कर्मचारियों एवं अभियंताओं के विरुद्ध सामान्य धरना-प्रदर्शन में भाग लेने के कारण बड़े पैमाने पर अनुशासनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की गई हैं।
ये खबर भी पढ़े : बाढ़ सुरक्षा कार्यों का डीएम ने किया निरीक्षण, मानसून से पहले काम पूरा करने के निर्देशउन्होंने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के उपरांत ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने के निर्देश दिए जाने के बावजूद आज तक उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। संघर्ष समिति ने कहा कि संविदा कर्मियों की संख्या में भारी कमी आने से विद्युत फाल्टों के निस्तारण में अत्यधिक विलंब हो रहा है। अनेक स्थानों पर घंटों तक फाल्ट ठीक नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, पिछले 37 दिनों के दौरान कार्यस्थलों पर हुई दुर्घटनाओं में 22 से अधिक संविदा कर्मियों की मृत्यु हो चुकी है तथा 14 से अधिक संविदा कर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि यह सब पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की हठधर्मिता का परिणाम है। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं ऊर्जा मंत्री द्वारा बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद हटाए गए संविदा कर्मियों की बहाली नहीं की जा रही है तथा मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान एवं उसके बाद की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां भी वापस नहीं ली जा रही हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि विद्युत कर्मी अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में कार्य करते हुए उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपना जीवन तक जोखिम में डाल रहे हैं। ऐसी स्थिति में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को अपनी जिद छोड़ते हुए हटाए गए सभी संविदा कर्मियों की तत्काल बहाली करनी चाहिए तथा विद्युत कर्मियों और अभियंताओं के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियां तत्काल प्रभाव से वापस लेनी चाहिए, ताकि विद्युत व्यवस्था को सामान्य और सुरक्षित बनाया जा सके।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
