लेखा विंग में चूहों का बिल, बदबू से तिलमिलाये, ढ़ढने निकली सेना!
फुसफुसाहट शुरू, चारबाग स्टेशन के जिद्दी चूहों ने क्या बनाया नया ठिकाना
एक सरकारी विभागीय मुख्यालय के लेखा विंग में चूहों के आतंक से सब परेशान
लखनऊ। बीते कई दशक के दौर में भले ही राजधानी लखनऊ नवाबों की नगरी से आगे बढ़ते हुए अब अत्याधुनिक परिवहन साधन को अपनाते हुए मेट्रो शहर के रूप में तब्दील हो गया हो, मगर आज भी देखा जाये तो नवीन यात्री सुविधाओं से लैस चारबाग स्टेशन पर अभी भी अड़ियल व जिद्दी चूहों का आतंक जस का तस बरकरार है जिसको लेकर कई बार स्टेशन प्रबंधन व रेल प्रशासन ने टेंडर पर टेंडर किये लेकिन अभी तक पूरी तरह यात्रियों को यहां पर इन ढीट चूहों के भय से निजात नहीं मिल सकी।
लेकिन इसी बीच राजधानी लखनऊ के ह्दयस्थली यानी हजरतगंज एरिया में ही स्थित एक अहम सरकारी विभाग के विभागीय मुख्यालय पर लगता है कि काफी पहले से चारबाग स्टेशन के ये जिद्दी चूहें कहीं न कहीं और किसी न किसी रूप में शिफ्ट हो गये हैं। कुछ ऐसी ही फुसफुसाहट बीते कुछ दिनों से विभागीय मुख्यालय पर कार्यरत कर्मियों के बीच चल रही है। दरअसल हुआ ये कि, यहां के लेखा विंग में किसी कोने में पड़े या दबे मरे चूहे की बदबू ने वहां कामकाज करने वाले सरकारी बाबुओं के नाक में दम कर रखा है जिसको लेकर इन लोगों ने यहां के नजारत सेक्शन से शिकायत की।
वहीं इस पर जब मंथन किया गया तो यह प्रकाश में आया कि आखिर यहां के लेखा विंग में ही क्यों आये दिन चूहे के इस प्रकार के वाकये सामने आते हैं, दूसरे सेक्शन को लेकर ऐसी कोई बात सामने नहीं आती। बहरहाल, चूंकि किसी भी विभागीय कार्यालय का लेखा विंग अहम हिस्सा होता है तो ऐसे में यह निर्णय लिया गया कि जो रात्रिकालीन ड्यूटी में कर्मी लगे रहते हैं, उन्हें इस काम पर लगाया जाये और साथ ही यह भी बोला गया कि जिसने इस मरे हुए चूहे को खोज डाला तो उसे कुछ नकद ईनाम दिया जायेगा। इसके बाद ये कर्मियों का दलबल लेखा सेक्शन में गया मगर वहां पर चूंकि पहले से एसी चल रहा था तो उस दौरान मरे चूहे की बदबू ज्यादा समझ नहीं आ सकी और फिर यह रणनीति बनायी गयी कि सुबह कार्यालय खुलने के पहले ही इस चूहे की खोजबीन शुरू की जायेगी ताकि लेखा विंग की टीम पूरी तल्लीनता से विभागीय रूटीन कामकाज कर सके।
ऐसे में अंदरखाने में यह भी चर्चा शुरू हो गयी कि अगर उक्त रणनीति के बाद मुख्यालय के लेखा विंग में चूहों के आतंक से निजात नहीं मिली तो क्या रेलवे की तरह यहां पर भी सरकारी तौर पर टेंडर प्रक्रिया जारी करनी होगी जिसके लिये बकायदे बजट आवंटन करना होगा, विभागाध्यक्ष की अनुमति लेनी होगी वगैरह, वगैरह...।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
