केजीएमयू: पीजी प्रैक्टिकल प्रयोगशाला शुभारंभ

— थैलेसीमिया जैसे वंशानुगत रोगों की जांच सुविधा होगी आसान

Published By Shubham Kashyap
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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग में नव-नवीनीकृत स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रायोगिक प्रयोगशाला में डीबीटी निदान  केंद्र का शुभारंभ किया गया। इसका उद्घाटन प्रो.सोनिया नित्यानंद,कुलपति किया।
इस दौरान कुलपति ने पैथोलॉजी विभाग को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं नैदानिक सुविधाओं में इस महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने नवीनीकृत यूजी व पीजी प्रायोगिक प्रयोगशाला में किए गए आधुनिक विकास कार्यों की सराहना की,जिनसे एमबीबीएस विद्यार्थियों की पूर्ण बैच क्षमता के अनुरूप एक बेहतर,आधुनिक एवं अनुकूल शिक्षण वातावरण उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि डीबीटी निदान केंद्र भावी माता-पिता ( एक्सपेक्टिंग कपल्स  ) को थैलेसीमिया जैसे वंशानुगत रोगों की जांच सुविधा प्रदान करेगा। उन्होंने इस अवसर पर “ उपचार से बेहतर रोकथाम ”  (  प्रवेशन इस बेटर थान क्योर ) के महत्व पर बल दिया। साथ ही उन्होंने नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग को समय पर पहचान एवं उपचार के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.सुरेश बाबू ने विभाग की उत्कृष्ट स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षण व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि यह निदान परियोजना एक बहु विभागीय सहयोगात्मक प्रयास है,जिसमें पैथोलॉजी विभाग, बाल रोग विभाग, क्लिनिकल हीमैटोलॉजी विभाग तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं।

 
 
 
 
 

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शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

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