वीरांगना अवंतीबाई चिकित्सालय में कंगारू मदर केयर की शुरुआत
— मां की छाती से संपर्क से नवजात को मिलेगी सुरक्षित शुरुआत
लखनऊ। वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय में इमीडिएट कंगारू मदर केयर का शुभारंभ किया गया। भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप अब कम वजन एवं समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों को जन्म के तुरंत बाद कंगारू मदर केयर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य नवजात को जन्म के पहले घंटे से ही त्वचा-से-त्वचा संपर्क और शीघ्र स्तनपान का लाभ उपलब्ध कराना है। शुभारंभ के दौरान लेबर रूम में समय से पूर्व जन्मी 2.3 किलोग्राम वजन की नवजात बच्ची को उसकी दादी द्वारा आई-केएमसी प्रदान करते हुए वार्ड में शिफ्ट किया गया। इस पहल का उद्घाटन प्रमुख चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. ज्योति मेहरोत्रा एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय दोहरे ने किया।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षिका ने कहा, "विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर आई-केएमसी की शुरुआत हमारे अस्पताल के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। गाइडलाइन के अनुरूप अब समय से पूर्व जन्मे एवं कम वजन वाले पात्र नवजातों को यह सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय दोहरे ने कहा, "अस्पताल में आई-केएमसी को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक पात्र नवजात को जन्म के तुरंत बाद यह सुविधा उपलब्ध हो, ताकि उसे बेहतर नवजात देखभाल के साथ स्तनपान का लाभ भी समय पर मिल सके।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.सलमान खान ने केएमसी का प्रदर्शन करते हुए आई- केएमसी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समय से पूर्व जन्मे एवं कम वजन वाले नवजातों के लिए कंगारू मदर केयर एक प्रभावी एवं वैज्ञानिक पद्धति है। जन्म के तुरंत बाद आई- केएमसी शुरू करने से नवजात मृत्यु के जोखिम में 25 प्रतिशत तक, संक्रमण के जोखिम में 18 प्रतिशत तक तथा हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान कम होने) के खतरे में 35 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
इसमें नवजात को जन्म के तुरंत बाद मां या आवश्यकता पड़ने पर परिवार के किसी सदस्य की छाती से त्वचा-से-त्वचा संपर्क में रखा जाता है। इससे नवजात का शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, मां के दूध का स्राव बढ़ता है, नवजात के बेहतर विकास में मदद मिलती है तथा मां-बच्चे के भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूती मिलती है। साथ ही अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि और उपचार संबंधी जटिलताओं में भी कमी आ सकती है। इस मौके पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एच.एस. गुप्ता, डॉ. फैजान, नर्सिंग ऑफिसर किरणलता सोनकर, लालमती, मीरा, सोनी, आभा, सरोज सहित चिकित्सालय के चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
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शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
