पुलिस पर अटैक, आबकारी हुआ अलर्ट!

कासगंज में शराब माफियाओं से हुई भिड़त में सिपाही की मौत ने खडे किये कई सवाल

बिकरू कांड की यादें हुईं ताजा, सकते में आया आबकारी प्रवर्तन दस्ता

आबकारी का कार्यक्षेत्र बड़ा, पर पुलिस के मुकाबले अधिकार व संसाधन सीमित

रवि गुप्ता
लखनऊ। मथुरा के कासगंज में पुलिस टीम के साथ शराब माफियाओं ने जो जघन्य कृत्य किया, वो ऐसा अक्षम्य अपराध है जिसकी धमक पुलिस विभाग में ऊपर से नीचे लेकर तक ही नहीं बल्कि आबकारी विभाग भी इस वारदात से सहम गया है। कहा तो यह भी जा रहा है कि अभी उन्नाव के बिकरू कांड में बेवजह काल के गाल में समां जाने वाले खाकी वर्दी धारियों से जुड़ी दिल दहला देने वाली वारदात हर खासोआम के जेहन से धुंधली भी नहीं हो पायी थी कि अब कासंगज में फिर से सीधे पुलिस पर अटैक करके अवैध शराब के सिंडिकेट ने सत्ता-शासन को खुली चुनौती दे दी है। वहीं दूसरी तरफ आबकारी विभाग से जुडेÞ उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो कासंगज की घटना ने अंदर ही अंदर इस विभाग के प्रवर्तन अधिकारियों, निरीक्षकों व हमराहियों को झकझोर कर रख दिया है। इनका मानना है कि भले ही कासंगज में पुलिस टीम पर हमला हुआ, उसमें एक सिपाही की मौत भी हो गई…मगर इसका विपरीत असर कहीं न कहीं आबकारी विभाग के प्रवर्तन टीम पर पड़ेगा, क्योंकि प्रकरण का सीधा संबंध तो आबकारी विभाग से ही है। इनका तो यह भी मानना है कि जब हर प्रकार के संसाधन से लैस पुलिस पर ऐसे अटैक हो सकता है, तो फिर इनके आगे उनकी क्या बिसात…क्योंकि उनके पास तो पहले से ही सीमित संसाधन रहते हैं जबकि उनका कार्यक्षेत्र का दायरा किसी भी पुलिसवाले से कहीं बड़ा होता है। पुलिस तो कानून-व्यवस्था के मद्देनजर कड़ी कार्रवाई की भूमिका में कभी भी आ सकती है जबकि आबकारी टीम पर अनेक प्रकार के परोक्ष व प्रत्यक्ष दबाव बने रहते हैं। इसी क्रम में प्रदेश में काफी समय से शराब का कारोबार करने वाले कुछ प्रमुख अनुज्ञापियों का तो यह भी मत है कि ऐसे अनापेक्षित घटनाओं के लिये कहीं न कहीं हर साल विभाग द्वारा बढ़ायी जाने वाली लाइसेन्सिंग व अन्य मदों में जमा की जाने वाली भारी-भरकम फीस है जिसका दबाव हर समय पूरे वित्तीय बरस तक संबंधित अनुज्ञापी के कंधों पर रहता है। उनके अनुसार वो कभी भी ऐसे शराब माफियाओं के कृत्यों का समर्थन नहीं करते, मगर कासंगज वारदात के पीछे की वजह भी जानना बहुत जरूरी है…कि आखिर अवैध शराब कारोबार करने वालों ने पुलिसिया विरोध करने का इतना दुस्साहसिक कदम क्यों उठाया।
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‘योगी सरकार अपराध को लेकर पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की नीति पर काबिज है। कासगंज में शराब माफियाओं ने जो पुलिस टीम के साथ किया है, उसके खिलाफ त्वरित व कड़ी कार्रवाई की जायेगी। एक शराब माफिया का एनकाउंटर भी किया गया है। अवैध शराब से जुड़ी गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगाया जा रहा। आबकारी विभाग के प्रवर्तन टीम के पास पूरे संसाधन हैं, चिंता की कोई बात नहीं है। ’
-:रामनरेश अग्निहोत्री, आबकारी मंत्री उप्र



‘पुलिस फोर्स व आबकारी प्रवर्तन टीम की कार्यशैली में काफी अंतर है। कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के मद्देनजर पुलिस किसी भी शराब माफिया या सिंडिकेट के खिलाफ रिपोर्ट लिख सकती है, जेल में डाल सकती है, उसके पास पर्याप्त संसाधन भी होते हैं। जबकि आबकारी विभाग पर अधिक दबाव रेवन्यू कलेक्शन का होता है। आबकारी टीम भले ही खाकी वर्दी पहनती है, मगर त्वरित व कड़ी कार्रवाई के तहत पुलिस इतना अधिकार उसके पास नहीं हैं। निश्चित तौर पर कासंगज की घटना का असर आबकारी प्रवर्तन दस्ते पर भी पडेगा, उनके मनोबल पर भी विपरीत असर पड़ सकता है।’
-:विवेक श्रीवास्तव, वरिष्ठ अपराध संवाददाता लखनऊ

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