इतनी सख्ती के बावजूद पेपर लीक होने से उठ रहे सवाल!

अब तक क्यों समाधान नहीं कर पायी सरकार, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इतनी सख्ती के बावजूद पेपर लीक होने से उठ रहे सवाल!

पटनाः नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक के संदेह के घेरे में है. पटना पुलिस ने जो FIR दर्ज की है उसमें पेपर लीक की बात कही गई है. हालांकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पेपर लीक मानने को तैयार नहीं है. आपकों बता दें कि ये तो नीट का मामला लेकिन बिहार भी इसमें पीछे नहीं है. किसी परीक्षा में पेपर लीक ना हो तो बिहार के लिए यह नई बात जरूर होगी. चाहे 67वीं बीपीएससी पेपर लीक का मामला हो या अमीन बहाली का. सिपाही बहाली परीक्षा पेपर लीक और शिक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक काफी चर्चा में रहा.

उठ रहे सवालः ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या बिहार में पेपर लीक का वाकई कोई निदान संभव है? बिहार में इतनी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक हो रहे हैं लेकिन यह चुनाव का मुद्दा नहीं बन पा रहा है. लोकसभा चुनाव हो रहे हैं लेकिन किसी राजनीतिक दल के जुबान पर पेपर लीक का मुद्दा नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि सभी राजनीतिक दलों के शासन के कालखंड में पेपर लीक हुए हैं. ऐसे में एक्सपर्ट के नजरिए से जानते हैं कि क्या बिहार में वाकई पेपर लीक का निदान संभव है या नहीं.

क्या कहते हैं अभिभावक?
पटना के राजा चंद्रवंशी के बच्चे भी प्रतियोगिता की तैयारी करते हैं. उन्होंने बताया कि पेपर लीक की समस्या उनके जैसे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अभिशाप है. बच्चे परीक्षा की तैयारी करते हैं और जब परीक्षा देकर आते हैं तो पता चलता है पेपर लीक हो गया है. बच्चों के मेहनत पर पानी फिर जाता है और उनका हौसला टूट जाता है. सिर्फ बच्चों का हौसला नहीं टूटता उनके जैसे अभिभावकों का भी हौसला टूट जाता है. उन्होंने तकहा कि लोन लेकर बच्चों की पढ़ाई कराते हैं लेकिन मेधावी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. उन्होंने इसका जिम्मेवार नेताओं और माफियाओं को बताया.

"जब तक देश में माफिया रहेंगे तब तक यह होता रहेगा. इसमें बहुत दूर-दूर तक माफियाओं का हाथ है. इसमें बड़े-बड़े हस्ती का भी नाम आते रहता है. हमलोग अपने बच्चों को जमीन बेचकर और लोन लेकर पढ़ाते हैं लेकिन इन लोगों के कारण पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है. ऐसे लोगों के साथ सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए." - राजा चंद्रवंशी, अभिभावक

क्या कहते हैं नेता? पेपर लीक की समस्या राजनीतिक मुद्दा क्यों नहीं बन पाता है इस पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सुमित शशांक ने गोलमोल जवाब दिया. कहा कि भारतीय जनता पार्टी पेपर लीक की समस्या के निदान के लिए लगी हुई है. केंद्रीय जांच एजेंसी इस पर सख्ती से कार्रवाई कर रही है. सदन में पार्टी ने अंतिम पेपर लीक बिल पास कराया है. इसमें ऐसे अवैध अधिकारियों में लिप्त लोगों पर कठोरतम कार्रवाई का प्रावधान है.

"बिहार जैसे राज्य में आसपास के पड़ोसी राज्यों का भी असर पड़ता है. बंगाल और झारखंड में शिक्षा माफियाओं का सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों का संरक्षण प्राप्त है. इसका खामियाजा बिहार में लोगों को उठाना पड़ रहा है. चुनावी मुद्दा भले ही यह बने ना बने लेकिन पार्टी का इस पर स्पष्ट रूख है कि किसी भी मेधावी युवाओं की हकमरी नहीं होगी." -सुमित शशांक, प्रवक्ता, BJP

इसका क्या है समाधान?
नीट परीक्षा की तैयारी कराने वाले शिक्षक आशुतोष झा ने कहा कि पेपर लीक की अधिकांश घटनाएं ऑफलाइन मोड वाले एग्जाम में हो रही हैं. कहीं ना कहीं यह सिस्टम का फेलियर जरूर है लेकिन एक बहुत बड़े सिस्टम में आज की डिजिटल जमाने में पेपर लीक को रोकना चुनौती है. शिक्षा माफिया जुगाड़ में लगे रहते हैं कि कहीं ना कहीं से पेपर लीक किया जाए. नीट परीक्षा का उदाहरण ले तो 23 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए हैं. देशभर में हजारों परीक्षा केंद्र बनाए गए. परीक्षा माफिया पेपर लीक के जुगत में रहते हैं और वह हजारों परीक्षा केंद्र में कहीं ना कहीं से वह पेपर लीक करा लेते हैं.

"परीक्षा को ऑनलाइन मोड में ले जाना होगा. जो ऑफलाइन मोड में परीक्षा हो रही है उसमें प्रश्न पत्र के अलग-अलग सेट तैयार करने होंगे. नीट परीक्षा में अलग-अलग प्रश्न पत्र जरूर होते हैं लेकिन प्रश्न वही रहता है. प्रश्नों का क्रमांक बदला हुआ रहता है. अलग-अलग प्रश्नों के अलग-अलग सेट होंगे तो किसी एक सेट का पेपर लीक होगा और एक सेट को ही रद्द करना होगा." -आशुतोष झा, शिक्षक

पेपर लीक बिहार के लिए दुर्भाग्य
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने बताया कि पेपर लीक होना बिहार के लिए दुर्भाग्य है. यह बहुत ही शर्मनाक स्थिति है. इससे मेधावी बच्चों को सबसे अधिक नुकसान होता है. उन्होंने कहा कि यह सरकार और परीक्षा कंडक्ट कराने वाली एजेंसी की लापरवाही है. कई मामलों में यह भी देखा गया है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी के कुछ लोग भी इसमें लिप्त होते हैं. इसे रोकने के लिए सरकार को चाहिए कि जो लोग भी इसमें लिप्त लोगों पर कठोर कार्रवाई करे.

पेपर लीक चुनाव में मुद्दा नहीं बन पाता है इसके लिए युवा संगठन दोषी हैं. युवाओं और छात्रों के संगठन को चाहिए कि इस पर आंदोलन करें और इसे प्रमुखता से मुद्दा बनाएं. पेपर लीक में जो शिक्षा माफिया होते हैं उनके राजनीतिक दलों के प्रमुखों से सांठ-गांठ होती है और वह इस मामले को मुद्दा ही नहीं बनना चाहते. युवाओं को आगे आना होगा." -प्रवीण बागी, वरिष्ठ पत्रकार

काफी समय से हो रहा पेपर लीक
PMCH के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉक्टर बीके सिंह ने बताया कि वह जब से पीएमसीएच में डॉक्टर बने हैं तब से मेडिकल एंट्रेंस एग्जामिनेशन में सॉल्वर्स गैंग्स की एक्टिविटी और पेपर लीक की घटनाओं को देखते रहे हैं. उन्हें लगता है कि इसके लिए पूरा समाज दोषी है. क्योंकि समाज के सभी वर्गों के कुछ लोग इसमें लिप्त हैं. इसीलिए यह चुनावी मुद्दा भी नहीं बन पाता है.

"कोई भी नियम तब तक प्रभावशाली नहीं बन सकता जब तक उसे लागू करने वाले लोग ईमानदार नहीं हो. यदि परीक्षा कराने वाली एजेंसी के लोग ईमानदार हो तो पेपर लीक की घटनाओं को रोका जा सकता है. समाज में मजबूत तबके के लोग ऐसे काम के लिए काफी पैसा चुकाने के लिए तैयार रहते हैं. उनके भीतर नैतिकता जरूरी है. इसके अलावा जो लोग पेपर लीक में लिप्त हैं उन पर भारी अर्थ दंड लगाया जाए." -डॉक्टर बीके सिंह, PMCH के रिटायर्ड प्रोफेसर

हिंदी पट्टी में ज्यादा पेपर लीक
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास ने बताया कि हिंदी पट्टी राज्यों में खासकर बिहार-झारखंड जैसे राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं होती हैं. इसका प्रमुख कारण है शिक्षा माफियाओं को सत्ता का संरक्षण प्राप्त होता है. हाल के दिनों में अगर देखे तो कई परीक्षाओं में पेपर लीक हुए हैं. आर्थिक अपराधी इकाई ने जांच की है. जांच में छोटी मछलियां गिरफ्तार हुई है और बड़ी मछलियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त होने के कारण उन पर कार्रवाई नहीं हो पाती है.

"जांच एजेंसी यह नहीं बता पाती है कि इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई हुई है? इसके अलावा 90 दिनों के अंदर शिक्षा माफिया पर पुलिस चार्ज शीट दाखिल नहीं कर पाती है जिसके कारण शिक्षा माफिया जमानत पर छूट जाते हैं और फिर से इस काम में लग जाते हैं." -अमिताभ दास, पूर्व आईपीएस

सरकार से पूछना चाहिए सवाल
अमिताभ दास ने बताया कि शिक्षा माफिया सोचते हैं कि अधिक से अधिक 3 महीने की जेल होगी. जेल से छूटकर फिर वह इस काम में लिप्त हो जाते हैं. इस पैसे से वह जमीन खरीदने के साथ-साथ अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित कर लेते हैं. इन शिक्षा माफियाओं पर भारी अर्थ दंड भी लगाने की आवश्यकता है और युवाओं को भी जागृत होने की आवश्यकता है. युवाओं को सरकार से पेपर लीक का सवाल पूछना चाहिए और इसके लिए निदान मांगना चाहिए.

 

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‘तरुणमित्र’ श्रम ही आधार, सिर्फ खबरों से सरोकार। के तर्ज पर प्रकाशित होने वाला ऐसा समचाार पत्र है जो वर्ष 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जैसे सुविधाविहीन शहर से स्व0 समूह सम्पादक कैलाशनाथ के श्रम के बदौलत प्रकाशित होकर आज पांच प्रदेश (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड) तक अपनी पहुंच बना चुका है। 

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