महर्षि दधीचि की नगरी मिश्रिख किसे पहनाएगी जीत का ताज

 महर्षि दधीचि की नगरी मिश्रिख किसे पहनाएगी जीत का ताज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में शामिल मिश्रिख सुरक्षित सीट की प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका है। भारतीय हिंदू पौराणिक कथाओं में सबसे महान ऋषि में से एक महर्षि दधीचि का जन्म यहीं हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन यहीं बिताया था, इसलिए यह क्षेत्र दधीचि कुंड की वजह से भी प्रसिद्ध है। हरदोई, कानपुर नगर और सीतापुर तीन जिलों की विधानसभा सीटों से मिलकर बनी ये सुरक्षित सीट पिछले एक दशक से भाजपा का गढ़ है। मिश्रिख लोकसभा उत्तर प्रदेश की सीट नंबर- 32 है। यहां चौथे चरण में 13 मई को मतदान होगा।

मिश्रिख लोकसभा सीट का इतिहास-
मिश्रिख (अ0जा0) सीट के संसदीय इतिहास की बात करें तो यह सीट 1962 में अस्तित्व में आई। पहले चुनाव में यहां से जनसंघ प्रत्याशी गोकर्ण प्रसाद को जनता ने बहुमत देकर संसद पहुंचाया। 1967 और 1971 में कांग्रेस यहां से जीती। आपातकाल के बाद 1977 में हुए आम चुनाव में भारतीय लोकदल से रामलाल राही जीते। मिश्रिख सीट पर 1996 के आम चुनाव में पहली बार कमल खिला। 2004 और 2009 के आम चुनाव में बसपा ने यहां जीत का परचम फहराया। 2014 के चुनाव में मोदी लहर में भाजपा ने इस सीट पर भी जीत हासिल कर ली। तब डॉ. अंजूबाला यहां से सांसद चुनी गई थीं। हालांकि 2019 के चुनाव में भाजपा ने सांसद अंजूबाला की जगह अशोक रावत को मैदान में उतारा और वह भी विजयी रहे। कांग्रेस को पिछले तीन दशकों से इस सीट पर जीत का इंतजार है।

पिछले दो चुनावों का हाल-
2019 के लोकसभा चुनाव में मिश्रिख संसदीय सीट पर 57.13 फीसदी मतदान हुआ था। भाजपा ने अशोक कुमार रावत को चुनाव में उतारा था। रावत ने बसपा प्रत्याशी डॉ. नीलू सत्यार्थी पर 1 लाख 672 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। कांग्रेस चुनाव में तीसरे पायदान पर रही थी। भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार रावत को 534,429 (52.02 प्रतिशत) वोट मिले जबकि नीलू सत्यार्थी के खाते में 433,757 (42.22 प्रतिशत) वोट आए थे। कांग्रेस प्रत्याशी मंजरी राही 26505 (2.58 प्रतिशत) वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रही।

2014 के चुनाव की बात करें, तो इस चुनाव में भी भाजपा ने ही बाजी मारी थी। तब पार्टी ने अंजू बाला को अपना उम्मीदवार बनाया था, तब उन्हें 412,575 (41.33 प्रतिशत) वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहे बसपा प्रत्याशी अशोक कुमार रावत को 325,212 (32.58 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए थे। सपा उम्मीदवार जयप्रकाश को 194,759 (19.51 प्रतिशत) वोट मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं चौथे स्थान पर रहे कांग्रेस उम्मीदवार ओम प्रकाश को 33,057 (3.31 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में मिश्रिख संसदीय सीट पर 57.86 फीसदी मतदान हुआ था।

किस पार्टी ने किसको बनाया उम्मीदवार-
भाजपा ने मौजूदा सांसद अशोक कुमार रावत को मैदान में उतारा है। बसपा से वी0आर0 अहिरवार और सपा से संगीता राजवंशी मैदान में हैं। इस सीट पर कुल 9 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 3 निर्दलीय हैं।

मिश्रिख सीट का जातीय समीकरण-
मिश्रिख संसदीय सीट पर 18 लाख, 76 हजार 645 मतदाता हैं। इस संसदीय सीट के जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां सबसे अधिक लगभग दलित 35 फीसदी अनुसूचित जाति की आबादी निवास करती है। इस वर्ग में भी पासी बिरादरी के वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसलिए राजनीतिक दल ज्यादातर पासी उम्मीदवारों पर दांव लगाते हैं। मिश्रिख सीट में हार जीत में अगड़ी और पिछड़ी दोनों जातियों की अहम भूमिका रहती है। ग्रामीण वोटर प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला करते हैं। क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य मतदाताओं के साथ ही पिछड़ी जातियों में से कुर्मी, गड़रिया, काछी, कहार व यादव को छोड़ कर अन्य पिछड़ी जातियों का गठजोड़ जीत हार तय करता है। कोरी वोटर भी अहम भूमिका निभाते हैं।

विधानसभा सीटों का हाल-
इस संसदीय सीट के तहत सीतापुर की मिश्रिख (अ0जा0), कानपुर की बिल्हौर और हरदोई की बालामऊ, मल्लावां तथा संडीला विधानसभा सीटें रखी गई हैं। सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है।

जीत का गणित और चुनौतियां-
पिछले चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन था। बावजूद इसके बसपा प्रत्याशी नीलू सत्यार्थी इस सीट पर रनरअप रही थीं। इस बार सपा-कांग्रेस गठबंधन में है, और बसपा अकेले मैदान में है। ऐसे में विपक्ष की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा प्रत्याशी अशोक रावत की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। सपा प्रत्याशी संगीता राजवंशी और भाजपा प्रत्याशी आपस में रिशतेदार हैं। संगीता राजवंशी के ससुर और पति का ठीक ठाक राजनीतिक रसूख है। तीन जिलों में फैली मिश्रिख सीट पर इस बार भाजपा, बसपा और सपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं। अगर त्रिकोणीय मुकाबले में तीनों दल मजबूत लड़ते हैं, तो फिर बाजी किसी के भी हाथ लग सकती है।सीतापुर के स्थानीय पत्रकार महेन्द्र गुप्ता के मुताबिक, इस बार मिश्रिख में बाजी किसके हाथ लगेगी ये साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता। हालांकि डबल इंजन की सरकार के विकास कार्यों और राम मंदिर का असर क्षेत्र में दिखाई देता है।

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