किसान आंदोलन: कई जिलों में इंटरनेट बंद

मार्च से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी जारी

किसान आंदोलन: कई जिलों में इंटरनेट बंद

15 जिलों में धारा-144, 2 स्टेडियम में बनाए गए जेल किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने किए कई इंतजाम

नयी दिल्ली। किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली के सभी बॉर्डर सील कर दिए गए हैं। सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों को रोकने के लिए कटीले तार और कंक्रीट के बैरिकेट लगाकर बॉर्डर को सील कर दिया गया है। हरियाणा के 7 जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक किसान पंजाब से दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। भारी संख्या में ट्रैक्टर और ट्रॉली से किसान दिल्ली के लिए कूच कर रहे हैं। इन किसानों को हरियाणा में ही रोकने की तैयारी की जा रही है।
 
दिल्ली के सभी बॉर्डर पर धारा-144 लागू की गई है। किसानों को रोकने के लिए इन सीमाओं को कंक्रीट के अवरोधक, सड़क पर बिछने वाले नुकीले अवरोधक और कंटीले तार लगाकर सीमाओं को किले में तब्दील कर दिया गया है। इसके अलावा चंडीगढ़ में दो महीने के लिए निषेधाज्ञा लगाई गई है। हरियाणा में अंबाला, सिरसा, रोहतक, सोनीपत, झज्जर, जींद, कुरुक्षेत्र, कैथल, हिसार, फतेहाबाद, भिवानी और पंचकूला में धारा-144 लागू की गई है। पुलिस किसान नेताओं पर कड़ी नजर रख रही है।
किसानों आंदोलन को देखते हुए हरियाणा में 2 स्टेडियम को अस्थाई जेल में तब्दील कर दिया गया है।
 
अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर पंजाब की सीमा सील कर दी गई है। जींद और फतेहाबाद में पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर हैं। सिरसा स्थित चौधरी दलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम और डबवाली के गुरु गोविंद सिंह स्टेडियम को अस्थायी जेल बना दिया है। उपद्रव के दौरान अगर किसी को गिरफ्तार किया जाता है तो उसे इन जेल में शिफ्ट किया जाएगा।कई जिलों में इंटरनेट बंदकिसानों को प्रदर्शन को देखते हुए हरियाणा में सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी जा रही है। फतेहाबाद, सिरसा, अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार और डबवाली में इंटरनेट बंद कर दिया गया है।
 
गलत अफवाह फैलाने वालों को भी चेतावनी दी है। बता दें कि किसान यूनियनों की मांगों पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार ने 12 फरवरी को उन्हें एक और बैठक के लिए आमंत्रित किया है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के ज्यादातर किसानो संघों ने फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी को लेकर कानून बनाने की मांग कर रहा है।बता दें कि फिर एक बार केंद्र सरकार एक बार फिर मुश्किल में है। किसान आंदोलन का साया देश की राजधानी दिल्ली पर एक बार फिर मंडरा रहा है।
 
केंद्र की तमाम कोशिशों के बावजूद भी किसान संगठन सुनने को तैयार नहीं हैं। पंजाब से लगातार किसानों का जत्था दिल्ली की ओर कूच कर रहा है। पंजाब और हरियाणा से दिल्ली की ओर आने वाले रास्तों को ब्लॉक किया जा रहा है।पिछली बार किसान आंदोलन का सबसे चर्चित चेहरा गुरुनाम सिंह चढ़ूनी थे। पर इस बार चढ़ूनी अब तक इस आंदोलन के साथ नहीं है। खबर है कि हरियाणा और पंजाब के किसान संगठनों के दिल्ली कूच से बीकेयू के गुरनाम सिंह चढूनी गुट ने खुद को अलग कर लिया है। चढूनी ने सोशल मीडिया पर अपने असंतोष का बयान किया है।
 
उन्होंने कहा है कि दिल्ली कूच का ऐलान सभी संगठनों की राय से नहीं किया गया है। हालांकि चढ़ूनी ने यह भी कहा है कि अगर, किसान संगठन उन्हें बुलाएंगे तो वह जरूर जाएंगे। लेकिन, अभी तक उनके पास कोई संदेश नहीं आया है। चढ़ूूनी की बात से लगता है कि कहीं न कहीं किसान आंदोलन पर इस बार दूसरे लोग हॉवी हैं। एक और संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से भी बयान आया है कि वह इस बार किसान आंदोलन का हिस्सा नहीं होंगे क्योकि उन्हें न बुलाया गया और न उनसे राय ही ली गई।
 
किसान डॉ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानून चाहते हैं। इसके अलावा दूसरी प्रमुख मांग किसान मजदूरों और किसानों के लिए संपूर्ण कर्ज माफी है। भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को राष्ट्रीय स्तर पर दोबारा लागू करने, कलेक्टर दर से चार गुना मुआवजे की गारंटी और किसानों से हस्ताक्षरित सहमति लेने की मांग भी की जा रही है। बिजली संशोधन बिल 2020 को खत्म करने की मांग भी किसान कर रहे हैं।
 

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