राखियां: बाजार पर चढ़ा कलकत्ते-दिल्ली का रंग, चाईनीज़ का उड़ा रंग
बोले राखी विक्रेता, बदला बाजार का रुख, देसी राखियों की डिमांड बढ़ी
- चौक-चौराहों से लेकर ठेलों पर रंगबिरंगी व डिजाइनर राखियों की भरमार
- मोदी, योगी, कमल, बजरंगबली, महाकाल व कॉर्टून चित्रों वाली राखियां खूब पसंद
लखनऊ। रक्षाबंधन त्यौहार को लेकर एक ओर जहां प्रदेश की योगी सरकार ने पहले से ही अपने शासनकाल के प्रथम सत्र से ही विशेषकर महिला यात्रियों को जो निशुल्क रोडवेज बस सफर का तोहफा देना शुरू किया था, वो इस बार भी जारी है।
अब आगे ठीक राखी से चंद दिनों पहले योगी सरकार ने अब प्रदेश की 60 साल या इससे ऊपर की आयु वाली महिलाओं को इन्हीं बसों में पूरी तरह मुफ्त बस सेवा देने की नई सौगात सौंपने जा रही। ऐसे में इस बार शहर ए लखनऊ में भी राखी पर्व का आनंद दोगुना दिख रहा और इसके लिये बाजार हाट भी अलग अलग तरीके के रंगबिरंगी व डिजाइनर राखियों से भरा पड़ा दिख रहा।
इंदिरानगर तकरोही क्षेत्र के छोटू भाई बीते एक दशक से हर बार राखी के दो दिन पहले अपनी ठेलिया पर राखी बेचना शुरू करते हैं और पूरा माल त्यौहार पर खाली कर देते हैं। इस बार छोटू ने बताया कि अब तो कलकत्ते व दिल्ली मार्केट की राखियों की डिमांड ज्यादा है, स्टोन व रेशम धागे वाली राखियों का भी बेहतर रेंज है। उनके ठेले पर पांच रूपये से लेकर 100 और 150 तक की राखी उपलब्ध है जैसा खरीददार, वैसा माल।
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वहीं याहियागंज, पांडेयगंज, अमीनाबाद, चौक व पुराने लखनऊ के पुराने राखी विक्रेताओं का कहना रहा कि अबकी दफा तो बाजार का रुख थोड़ा बदला है, ज्यादातर देसी राखियों की मांग आ रही और ऐसे में चाइनीज राखी अबकी बार कम ही दिखायी पड़ रही। मोदी, योगी, कमल, महाकाल, ऊं, बजरंगबली, मोटू पतलू, कॉटूर्न चित्रों वाली राखियां भी काफी आकर्षक रंग रूप में नजर आ रही हैं जिनकी खरीददारी को लेकर लोगों खासकर बच्चों में काफी उत्साह दिख रहा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
