लोहिया संस्थान ने रोबोट-सर्जरी में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की
— रोबोट से निकाला बड़ी नसों में फैले खून का थक्का
— दुनिया में ऐसे बहुत कम मामले दर्ज हुए हैं
लखनऊ। लोहिया संस्थान के यूरोलॉजी विभाग ने डॉ.ईश्वर राम धायल, प्रोफेसर और विभाग के प्रमुख,यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट के नेतृत्व में — दुनिया भर में दर्ज सबसे दुर्लभ रोबोट-सर्जरी में से एक सफलतापूर्वक की है। तो वहीं 55 साल के एक मरीज में रोबोट की मदद से दाहिना गुर्दा निकालने के साथ-साथ शरीर की मुख्य नस और गोनैडल वेन में फैले खून के थक्के भी एक साथ निकाले गए। किडनी कैंसर के इस मामले में थक्का दिल से मात्र 3.5 सेंटीमीटर दूर तक फैल गया था, जबकि दूसरी नस में एक और थक्का कमर की नसों तक पहुँच गया था — ऐसा संयोजन दुनिया में बहुत कम मामलों में ही देखा गया है।
इतनी जटिलता के बावजूद, पूरी सर्जरी रोबोट से की गई और बड़ा ऑपरेशन करने की ज़रूरत नहीं पड़ी। केवल 350 मिलीलीटर खून बहा और खून चढ़ाने की नौबत नहीं आई। मरीज़ को आठ दिन में छुट्टी मिल गई और दो हफ़्ते बाद जांच में वह पूरी तरह ठीक मिला। यह उपलब्धि उस वक्त आई है जब संस्थान में सभी विभागों को मिलाकर 490 रोबोट-सर्जरी पूरी हो चुकी हैं, जिनमें से 382 (यानी लगभग 78 प्रतिशत) अकेले यूरोलॉजी विभाग ने की हैं —जिससे यह विभाग रोबोट-सर्जरी में अस्पताल का सबसे अग्रणी विभाग बन गया है। यह उत्तर प्रदेश भर के मरीज़ों के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाता है।
निदेशक प्रो.डॉ.सीएम. सिंह ने इसे “ संस्थान की अथक मेहनत और मरीज़-केंद्रित सोच का प्रतिबिंब ” बताया और कहा कि यह साबित करता है कि सरकारी अस्पताल भी देश के किसी भी बड़े अस्पताल के बराबर इलाज दे सकते हैं।
सर्जरी करने वाली टीम में शामिल
डॉ. ईश्वर राम धायल ,मुख्य सर्जन, डॉ. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. संजीत कुमार सिंह, डॉ. अनुराग पवार, डॉ. पृथ्वी और डॉ. सर्वज्ञ, बेहोशी के डॉक्टर डॉ. पी.के. दास और डॉ. प्रकृति, तथा नर्सिंग स्टाफ जेनिफर, रवि और ऋषभ शामिल है। इस मामले को एक अंतरराष्ट्रीय यूरोलॉजी पत्रिका में प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
