पूर्व मंत्री आबिद रज़ा व चेयरपर्सन फात्मा रज़ा ने शिक्षकों को किया सम्मानित
बदायूं। नगर पालिका परिसर में शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में विभिन्न शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री आबिद रजा, विशिष्ट अतिथि चेयरपर्सन फात्मा रजा तथा अध्यक्षता वरिष्ठ प्राचार्य गुलफाम सिंह यादव ने की। कार्यक्रम में सांसद आदित्य यादव के प्रतिनिधि अनिल भी मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि आबिद रजा ने कहा कि शिक्षक समाज में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों का दायित्व केवल विद्यार्थियों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करना भी है। देश की तरक्की में शिक्षकों का बड़ा योगदान है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ मानवता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में मजहब और बिरादरी के नाम पर राजनीति के बजाय इंसानियत की राजनीति होनी चाहिए, तभी देश सही मायने में तरक्की कर सकेगा। चेयरपर्सन फात्मा रजा ने कहा कि वह शिक्षकों का बहुत सम्मान करती हैं। आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसमें शिक्षा और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने शिक्षक सम्मान समारोह में उनके आह्वान पर पहुंचे सभी शिक्षकों का तहेदिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सम्मान में किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। वरिष्ठ प्राचार्य गुलफाम सिंह यादव ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां हैं। तकनीकी बदलाव, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों ने बच्चों के लिए ज्ञान के नए रास्ते खोले हैं, लेकिन गलत जानकारी और भ्रम की चुनौती भी बढ़ी है। शिक्षकों को बच्चों को जानकारी देने के साथ विवेक का इस्तेमाल करना भी सिखाना चाहिए, ताकि वे सही जानकारी पहचानकर उसका सकारात्मक उपयोग कर सकें।
सेवानिवृत्त शिक्षक राजीव राज ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा समृद्ध रही है। यहां ज्ञान को केवल रोजगार का माध्यम नहीं माना गया, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण विकास से जोड़कर देखा गया। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भी ऐसे तत्वों को अपनाने की जरूरत है, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने में मदद करें। सेवानिवृत्त शिक्षक अनवार उद्दीन ने कहा कि शिक्षक समाज के सबसे सम्मानित वर्गों में शामिल हैं। शिक्षक अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय बच्चों के भविष्य को संवारने में लगाते हैं। उनके योगदान का परिणाम कई बार तत्काल दिखाई नहीं देता, लेकिन वर्षों बाद जब उनके पढ़ाए विद्यार्थी सफलता हासिल करते हैं तो शिक्षक की मेहनत सार्थक होती है। समारोह में प्रोफेसर कमला माहेश्वरी, मास्टर जमील, आचार्य प्रताप सिंह, ममता नौगरिया, प्राचार्या सुषमा कथूरिया, पूर्व प्राचार्य खिजर साहब, पूर्व प्राचार्य सुबुर साहब, प्राचार्य गिन्दो देवी, सेवानिवृत्त एच.एफ. चंद्र, सेवानिवृत्त मजहर शब्बीर, सेवानिवृत्त मोहम्मद मियां, सीमा यादव, शहनाज बानो, कन्हैया लाल, मार्क्स नजम, वेदमित्र आर्य आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
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पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले शारिक नसीर वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के बदायूं ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज के साथ वह लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
