सिकुड़ती सरकारी शिक्षा, बढ़ते निजी स्कूल
कम हुए 25,126 स्कूल, 19,305 निजी स्कूल बढ़े
लखनऊ। शिक्षक दिवस पर चहुंओर शिक्षा एवं शिक्षकों का गुणगान हो रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश में बीते एक दशक में 25,126 स्कूल कम हो गये । जबकि निजी स्कूल 19,305 बढ़ गए। यह आंकड़ा किसी एक सरकार की नीयत का फैसला सुनाने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन शिक्षा के बदलते चरित्र को समझने के लिए जरूर पर्याप्त है। जिस शिक्षा को कभी राज्य की जिम्मेदारी माना जाता था, वह धीरे-धीरे बाजार के लिए बड़ा अवसर बनती जा रही है।
उत्तर प्रदेश का शिक्षा बजट इस बहस को और रोचक बनाता है। 2026-27 में बेसिक शिक्षा के लिए लगभग 77,622 करोड़ रुपये रखे गए हैं। प्रदेश के करीब 1.37 लाख सरकारी स्कूलों और लगभग 1.49 करोड़ सरकारी स्कूल विद्यार्थियों के आधार पर मोटा गणित करें तो यह लगभग 56.6 लाख रुपये प्रति स्कूल और करीब 52 हजार रुपये प्रति विद्यार्थी सालाना बैठता है। बजट में वेतन, योजनाएं, प्रशासन, भवन और दूसरी मदें शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश में 7,874 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक दर्ज है और उनमें 6.24 लाख से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं। शिक्षक की कमी, स्कूलों का आकार, सीखने की गुणवत्ता और निजी स्कूलों की ओर आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। जिस बच्चे को आज अच्छी शिक्षा नहीं मिली, उसका खोया हुआ अवसर अगले बजट में खरीदा नहीं जा सकता।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
