पीजीआई: बिना सर्जरी के घुटने के दर्द से मिला आराम
— रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन मरीज के घुटने का इलाज

लखनऊ। पीजीआई के डॉक्टरों ने 64 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया। मरीज को घुटनों के तेज दर्द से परेशान था।जिससे चलने—फिरने व दैनिक कार्य करने में दिक्कत आ रही था। पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के पीएमआर विभाग में उन्हें काफी आराम मिला।
डाक्टरों के मुताबिक, शांति देवी 64 वर्षीय लखनऊ निवासी, कई वर्षों से घुटनों के तेज दर्द से परेशान थीं। सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल हो गया था और थोड़ी दूरी चलना भी दर्दनाक था। उन्हें घुटना बदलने की सर्जरी की सलाह दी गई थी, लेकिन वे बड़े ऑपरेशन को लेकर आशंकित थीं। पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के फिजिकल मेडिसिन और रिहैबिलिटेशन डिपार्टमेंट ,पीएमआर में जांच के बाद उन्हें आराम मिला।
रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन किया गया, जिसके बाद उन्हें दर्द में काफी राहत मिली और वे फिर से आराम से चलने-फिरने और अपने दैनिक कार्य करने लगीं। ऐसे ही अनेक मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर, एपेक्स ट्रॉमा सेंटर,घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए एक आधुनिक और न्यूनतम इनवेसिव उपचार—की शुरुआत की है। यह सुविधा अब संस्थान के भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास विभाग में उपलब्ध है।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. सिद्धार्थ राय, भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास विभाग, पीजीआई ने कहा "कई मरीज घुटनों के गंभीर दर्द के बावजूद सर्जरी को लेकर असमंजस में रहते हैं। कूल्ड आरएफए हमें एक ऐसा विकल्प देता है जिससे बिना बड़े ऑपरेशन के प्रभावी दर्द से राहत दी जा सकती है। इससे मरीज बेहतर चल-फिर पाते हैं और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में सुधार होता है। साथ ही, अन्य क्रॉनिक दर्द स्थितियों में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।"
प्रो. अरुण श्रीवास्तव कहा हम हमेशा मरीजों के लिए नवीनतम और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कूल्ड आरएफए की शुरुआत से हम क्रॉनिक दर्द के इलाज में और बेहतर विकल्प दे पा रहे हैं, खासकर उन मरीजों के लिए जो सर्जरी नहीं करवा सकते।" पीएमआर टीम को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए संस्थान के निदेशक, पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन ने कहा,”एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में कूल्ड आरएफए की शुरुआत संस्थान की उस व्यापक दृष्टि के अनुरूप है, जिसमें रोगी-केंद्रित और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाते हुए, न्यूनतम इनवेसिव एवं प्रमाण-आधारित उपचारों को नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा बनाया जा रहा है। इसके उपचार की उपलब्धता, कार्यकुशलता और दीर्घकालिक रोग परिणामों में सुधार होगा,”।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
