देवरिया। कभी किसी ने सोचा भी नहीं था कि तीन दशक से अदालतों की फाइलों में दबा कोई मामला आखिरकार मुस्कान बनकर लौटेगा। लेकिन राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान ने यह कर दिखाया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा मेडिएशन एंड कंसीलियेशन प्रोजेक्ट कमेटी, सर्वोच्च न्यायालय के तत्वावधान में 1 जुलाई से 30 सितम्बर तक चले 90-दिवसीय राष्ट्रीय अभियान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने वो कर दिखाया जो उम्मीद से बढ़कर था।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज तिवारी के नेतृत्व में 974 वादों में से 111 वादों का निस्तारण हुआ जिसमें 30 वर्ष पुराना 1 वाद, 25 वर्ष पुराने 9, और 20 वर्ष पुराने 10 मामले भी थे जिन्हें सुलझाकर न केवल न्याय मिला, बल्कि दिलों में बरसों से जमी निराशा भी धुल गई।
इन मामलों में वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, उपभोक्ता शिकायतें, ऋण वसूली, भूमि विवाद और चेक बाउंस जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल थे। सबसे प्रेरक बात यह रही कि स्वयं मनोज तिवारी ने व्यक्तिगत रूप से 38 वादों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाया, जबकि अन्य मध्यस्थों ने 73 वादों का निस्तारण कराया।
श्री तिवारी ने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, यह संवाद और समझ का पुल है। इसमें हम न सिर्फ विवाद सुलझाते हैं, बल्कि रिश्तों को भी जोड़ते हैं। बताया कि यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि अब समाज में न्याय पाने की प्रक्रिया संवाद और सहमति के रास्ते से भी संभव है और यही असली न्याय का मानवीय चेहरा है।
अभियान की सफलता पर उन्होंने सभी मध्यस्थगणों, अधिवक्ताओं और वादकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अभियान केवल आँकड़ा नहीं, बल्कि विश्वास की नई शुरुआत है।