भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा पर्वत हैं क्या आपको पता है?
हिमाचल प्रदेश : भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा पर्वत हैं? जब भी प्रतियोगी परीक्षाओं में या सोशल मीडिया पर ये सवाल पूछा जाता है तो लोग अक्सर गलत जवाब ही देते हैं। ऐसे में लोग कभी उत्तराखंड, कभी सिक्किम तो कभी जम्मू-कश्मीर जवाब देते हैं। मगर, ऐसा नहीं है सरकारी आंकड़ों और भौगोलिक सर्वेक्षणों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश इस मामले में सबसे आगे है। लगभग 90% से अधिक क्षेत्र पर्वतीय होने के कारण इसे ' 'देवभूमि' या 'स्नोवी स्लोप्स' भी कहा जाता है। इस सवाल से कन्फ्यूज होने वाले लोग अक्सर ऊंची चोटियों को गिनते हैं, जबकि कुल पर्वतीय क्षेत्रफल और विविधता का आकलन अलग होता है।
हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्र के बारे में जानें
हिमाचल प्रदेश का कुल क्षेत्रफल लगभग 55,673 वर्ग किलोमीटर है। राज्य की भौगोलिक संरचना तीन मुख्य भागों में बंटी है। इसमें बाहरी हिमालय (शिवालिक), मध्य हिमालय (धौलाधार और पीर पंजाल) तथा आंतरिक या महान हिमालय (जांस्कर रेंज)। इसकी ऊंचाई 350 मीटर से 7,000 मीटर तक फैली हुई है। राज्य की सबसे ऊंची चोटी रियो पुरग्यिल (6,816 मीटर) है, जो LAC के पास स्थित है। यहां आपको सैकड़ों नामित चोटियां, ग्लेशियर, घाटियां और नदियां देखने को मिलेंगी। हिमाचल की विशेषता इसकी घनत्वपूर्ण पर्वतीयता है। पूरे राज्य में सड़कें, बस्तियां और कृषि भी पर्वतीय ढलानों पर आधारित हैं। बता दें कि, सतलज, राबी, चेनाब जैसी कई नदियों की उत्पत्ति यहां से होती है।
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उत्तराखंड में नंदा देवी जैसी ऊंची चोटियां हैं, लेकिन कुल पर्वतीय क्षेत्र हिमाचल जितना व्यापक और घना नहीं है। वहीं, लद्दाख/जम्मू-कश्मीर में K2 और साल्टोरो कांगरी-काराकोराम जैसी विश्वस्तरीय चोटियां हैं, लेकिन बड़े रेगिस्तानी और पठारी भाग भी शामिल हैं। इसके अलावा सिक्किम में कंचनजंगा है, लेकिन क्षेत्रफल इसका बहुत छोटा है।
पर्यटन कर दृष्टि से भी जानें
हिमाचल प्रदेश की 12 जिलों में से अधिकांश पूरी तरह पर्वतीय हैं। पर्यटन, सेब की खेती, हाइड्रोपावर और हर्बल उत्पादन इसकी अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार हैं। राज्य सरकार के अनुसार, यहां 300 से अधिक पर्यटन स्थल पर्वतों से जुड़े हैं – मनाली, शिमला, डलहौजी, किन्नौर, लाहौल-स्पीति आदि। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, भूस्खलन और बाढ़ बढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकार वन संरक्षण, सस्टेनेबल टूरिज्म और क्लाइमेट रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही हैं। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स में हिमाचल के वन क्षेत्र को मजबूत संरक्षण की जरूरत बताई गई है।
हिमाचल का महत्व
हिमाचल प्रदेश न सिर्फ ऊंचाई बल्कि पर्वतीय क्षेत्र के विस्तार, सांस्कृतिक विविधता (पहाड़ी भाषाएं, मंदिर, त्योहार) और पर्यावरणीय महत्व में अग्रणी है। कई यूजर्स प्राय: सोचते हैं कि सिर्फ हिमालयी राज्य में ही पर्वत हैं, ऐसे में यूजर्स हिमाचल की भौगोलिक वास्तविकता वे अवगत नहीं होते। गौरतलब है कि यह राज्य भारत की प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है, जहां पर्वत जीवन का अभिन्न अंग हैं।
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
