सीबीआई चार्जशीट में बड़ा खुलासा, एचपीपीसीएल अधिकारी की मौत में मानसिक प्रताड़ना का आरोप
शिमला। हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के महाप्रबंधक (नवीकरणीय ऊर्जा) विमल नेगी की मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शिमला की विशेष अदालत में दायर अपनी चार्जशीट में कई गंभीर खुलासे किए हैं।
चार्जशीट के अनुसार जांच में यह सामने आया है कि निगम के भीतर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे विमल नेगी को मानसिक प्रताड़ना और पेशेवर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
ये खबर भी पढ़े : हिमाचल में पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान शुरू, 1,293 पंचायतों में डाले जा रहे वोटसीबीआई ने इसे एक सुनियोजित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। इसका संबंध पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़े फैसलों और भुगतान प्रक्रियाओं से जोड़ा गया है।
सीबीआई के अनुसार विमल नेगी ने 15 जून 2024 को शोंगटोंग परियोजना से स्थानांतरण के बाद एचपीपीसीएल के कॉरपोरेट कार्यालय में कार्यभार संभाला था। वह महाप्रबंधक (नवीकरणीय ऊर्जा) के रूप में कार्यरत थे।
ये खबर भी पढ़े : 75 से कम छात्र संख्या वाले 10 कॉलेज बड़े संस्थानों में समाहित, छात्रों को मिलेगा 5 हजार महीना10 मार्च 2025 को वह शिमला से लापता हो गए थे और 18 मार्च 2025 को उनका शव सतलुज नदी से जुड़े गोविंदसागर क्षेत्र से बरामद किया गया था।
जांच के दौरान गठित बहु-संस्थागत मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में मौत का कारण "एंटी मॉर्टम डूबने से हुई श्वासावरोध" बताया। रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत 10 और 11 मार्च 2025 की दरम्यानी रात को हुई थी।
चार्जशीट में कहा गया है कि 18 मई 2023 को एचपीपीसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में हिमाचल सरकार की पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना को अहमदाबाद स्थित कंपनी प्रोज़ील इन्फ्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (अब प्रोज़ील ग्रीन एनर्जी लिमिटेड) को देने का फैसला लिया गया था। 19 मई 2023 को कंपनी को परियोजना का कार्यादेश जारी किया गया और अनुबंध के अनुसार इसे 180 दिनों के भीतर, यानी 14 नवंबर 2023 तक पूरा किया जाना था।
जांच एजेंसी के अनुसार उस समय एक आईएएस अधिकारी प्रबंध निदेशक (एमडी) थे, जबकि एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी महाप्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) के पद पर कार्यरत थे। बाद में 28 नवंबर 2023 को एक वरिष्ठ अधिकारी निदेशक (इलेक्ट्रिकल) के पद पर नियुक्त हुए।
सीबीआई का आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने कथित रूप से ठेकेदार कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आपराधिक साजिश रची। चार्जशीट में कहा गया है कि दोनों अधिकारियों ने अपने सार्वजनिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने के बजाय ऐसे कदम उठाए जिनसे परियोजना से जुड़े ठेकेदार को फायदा मिला।
सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने अधीनस्थ अधिकारियों पर ठेकेदार के पक्ष में प्रस्ताव तैयार करने का दबाव बनाया।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि ई-ऑफिस फाइलों में अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई आपत्तियों और टिप्पणियों को दबाया गया तथा निर्णय प्रक्रिया में उन्हें उचित महत्व नहीं दिया गया। एजेंसी के अनुसार इससे ठेकेदार कंपनी को लाभ पहुंचा।
चार्जशीट में "प्रशासनिक प्रताड़ना" का भी उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार परियोजना समय सीमा के भीतर पूरी नहीं हो सकी थी, इसके बावजूद ठेकेदार कंपनी को कार्य पूरा करने के लिए पांच अस्थायी समय-विस्तार (प्रोविजनल एक्सटेंशन ऑफ टाइम) दिए गए। इसके बाद भी परियोजना 15 अप्रैल 2024 तक अनुबंध की शर्तों के अनुरूप पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई थी।
सीबीआई ने अपनी जांच के निष्कर्षों में कहा है कि विमल नेगी की मौत की जांच के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मानसिक दबाव, पेशेवर उत्पीड़न और कथित अनियमित परियोजना मंजूरियों तथा भुगतान को आगे बढ़ाने के लिए रची गई साजिश से जुड़े तथ्यों का पता चला। एजेंसी का कहना है कि जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर यह चार्जशीट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
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