रवीश कुमार मणि
पटना (अ सं) । “ तरूणमित्र “ हिन्दी दैनिक में प्रकाशित खबर नायाब तरीक़ा 1 में आपने पढ़ा , शीर्षक : खनन विभाग ने महज़ 3 सेकेंड में काट डालें 286 ट्रकों के बालू चालान, बड़ा घोटाला? पर संज्ञान लेते हुए विभागीय मंत्री विजय सिन्हा ने जांच का आदेश दिया था और प्रधान सचिव खनन विभाग से एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट की मांग किया था । इसी अवधि में विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू हो गया । खनन विभाग में बालू माफिया पर कार्रवाई इतनी आसान नहीं है तभी तो एक माह बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो सकी है जबकि खनन निदेशक को सारे सबूत उपलब्ध करा दिया गया था । इसमें आसाम, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर , कर्नाटका, यूपी आदी राज्यों के गाड़ियों से फर्जी तरीक़े से बड़े पैमाने पर बालू स्टॉक किया गया था । जबकि 90% गाड़ियाँ कभी बिहार आयीं ही नहीं तो बालू ढुलाई कैसे कर लिया । गूगल अर्थ में भी किसी तरह गतिविधियां उक्त गाड़ियों की ,उक्त तिथि में बालू स्टॉक स्थल पर दिखाई नहीं देना फर्जीवाड़ा को पुख्ता कर दिया है ।
बालू माफियाओं ने महज 3 मिनट में 286 ट्रकों से बालू ढुलाई का कीर्तिमान बनाया, इसके बाद एक और कीर्तिमान जोड़ते हुए इस बार , बिना पटरी के अरवल से लेकर बिक्रम तक रेल गाड़ी दौड़ाने का काम किया है । रेल गाड़ी से बड़े पैमाने पर बालू स्टॉक किया है । जबकि अरवल से लेकर बिक्रम तक कोई रेलवे लाइन है ही नहीं ऐसा सभी जानते है । इस संबंध में अरवल और बिक्रम के स्थानीय लोगों से बात की गई तो , उन्होंने कहां की पागल हो गये हैं क्या , दिन में नशा कर लिए हैं क्या , क्यों मजाक कर रहें है । रेलवे लाइन के लिए लोग संघर्ष कर रहे है । जब बताया गया की बिक्रम , अरवल रेल परिचालन कर रेल गाड़ी से बड़े पैमाने पर बालू स्टॉक किया गया है । एक दो नहीं बल्कि फर्जीवाड़ा में तीन दर्जन बालू स्टॉक लाइसेंसधारी शामिल है । स्थानीय लोगों ने कहां की यह सब फर्जीवाड़ा है । खनन विभाग के मुख्यालय में बैठे अधिकारी आकर स्वयं देख लें कहां रेलवे लाइन है , सब के सब ……
बालू ढुलाई के लिए ट्रकों का अलग से खनन विभाग एक नंबर ( कोड - के एस नंबर) देती है , जीपीएस लगाना अनिवार्य होता है । ट्रकों के नंबर के साथ ही के एस नंबर और जीपीएस में ट्रक नंबर ( आरसी ) अनुसार अंकित रहता है । बालू कारोबार में लगे ट्रक पहले नदी तल से बालू लोडिंग करता है फिर तौल के लिए घाट संचालक के धर्मकांटा पर आता है वहां सीसीटीवी लगा रहता है जो मुख्यालय कमांड से जुड़ा रहता है । ट्रक का जीपीएस एक्टिव रहने के बाद धर्मकांटा के मात्रा के अनुसार गंतव्य स्थान के लिए चालान दिया जाता है ।
बालू कारोबार के लिए बनाएं गये पारदर्शिता प्रकिया के बाद बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया है । इसमें सबसे पहले घाट संचालक की भूमिका संदिग्ध है चुकी चालान काटने का अधिकार ( कम्प्यूटर एक्सेस ) घाट संचालक का होता है । बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर बालू स्टॉक किया गया है इसमें के - लाइसेंसधारी की भूमिका संदिग्ध है चुकी सीधे तौर पर गलत कर लाभ कमाया है । इसके साथ ही फर्जीवाड़ा के खेल में एनआईसी और पटना व अरवल जिला के तत्कालीन एमडीओ के साथ तत्कालीन माइनिंग इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध है । बालू घाट और बालू स्टॉक पर जब गाडियां उक्त तिथि पर पहुंची ही नहीं तो एनआईसी ने चालान कैसे पास पर दिया । बालू घाट के पास सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है , बालू स्टॉक स्थल पर सीसीटीवी लगा हुआ है ।
दोनों जगह सीसीटीवी का कमांड खनन मुख्यालय में है और सीधे तौर पर घाट से निकलते बालू ट्रक और बालू स्टॉक पर पहुंचते ट्रक को देखने की ज़िम्मेवारी सेंट्रल कंमाड को है । देखा जाएं तो फर्जीवाडा़ कर हो रहे अवैध बालू कारोबार में उक्त सभी शामिल है । बड़े स्तर पर फंस रहे लोगों पर कार्रवाई के जगह अब खनन विभाग के उच्च अधिकारी बचाने के तरकीब ढूंढ रहें हैं जो नामुमकिन दिखाई दें रहा है । पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता माधव राज ने कहां की सबूतों को देखने से ऐसा स्पष्ट लग रहा है की फर्जीवाड़ा की घटना हुई है , सारे सबूत होने के बाद भी कार्रवाई को दबाया जाना अपने आप में अपराध है ।