पीएम मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने के बचाव पर एडिटर्स गिल्ड ने MEA को घेरा, कहा- 'ऐसी सतही दलीलें न दें'
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने का बचाव करने वाले विदेश मंत्रालय (MEA) के एक अधिकारी के बयान पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कड़ी आपत्ति जताई है। पत्रकारों के संगठन ने कहा कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को ऐसी "सतही दलीलें" देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
गिल्ड ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे स्वतंत्र मीडिया के जरिए जनता के सवालों का जवाब दें। केवल सोशल मीडिया या एकतरफा संवाद पत्रकारों के साथ खुली बातचीत का विकल्प नहीं हो सकता।
क्या था पूरा मामला?
प्रधानमंत्री मोदी के हालिया न्यूज़ीलैंड दौरे के दौरान आयोजित भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में एक स्थानीय पत्रकार ने पूछा था कि प्रधानमंत्री ने इस यात्रा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की।
इस पर विदेश मंत्रालय के अधिकारी रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि इसका जवाब देना उनका काम नहीं है, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि मोदी "बिचौलियों के बजाय जनता से सीधे संवाद करना पसंद करते हैं। "उन्होंने यह भी दावा किया कि "भारतीय मतदाता मुख्यतः ग्रामीण हैं और वे सीधे संवाद पसंद करते हैं।"
एडिटर्स गिल्ड ने क्या कहा?
एडिटर्स गिल्ड ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ग्रामीण और शहरी, दोनों तरह के नागरिकों के सवालों का जवाब देना लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है।
संगठन ने कहा कि दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देशों में निर्वाचित नेता नियमित रूप से पत्रकारों के सवालों का सामना करते हैं और बिना पूर्व निर्धारित प्रश्नों के जवाब देना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
गिल्ड ने यह भी कहा कि सरकारी अधिकारियों को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए, जो भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी को कमजोर करने वाले प्रतीत हों।
विदेश दौरे के दौरान उठे थे सवाल
हाल के विदेश दौरों के दौरान नॉर्वे, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के पत्रकारों ने भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे कि प्रधानमंत्री मोदी अन्य विश्व नेताओं की तरह संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब क्यों नहीं देते।
इस मुद्दे पर भारत में भी विपक्ष ने सरकार की आलोचना की। कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत ने विदेश मंत्रालय के अधिकारी के बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
भारत की प्रेस स्वतंत्रता पर भी टिप्पणी
अपने बयान में एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि मीडिया सत्ता से जनता की ओर से जवाबदेही मांगने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। संगठन ने यह भी याद दिलाया कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर है।
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गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।
