सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में मंत्री विजय शाह की चिकन पार्टी की एनटीसीए ने मांगी रिपोर्ट

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने माना- नियमों का उल्लंघन हुआ

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में मंत्री विजय शाह की चिकन पार्टी की एनटीसीए ने मांगी रिपोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में स्थित राष्ट्रीय उद्यान सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) में मंत्री कुंवर विजय शाह और उनके दोस्तों की चिकन पार्टी के मामले में गुरुवार को नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) को पत्र लिखकर कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट मांगी है। यह पत्र एनटीसीए के सहायक वन महानिरीक्षक की तरफ से लिखा गया है। इसमें वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की शिकायत का जिक्र कर मामले में कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट मांगी है। वहीं, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भी मध्यप्रदेश सरकार को लेटर लिखा है। मंत्रालय ने मामले को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन माना है।

गौरतलब है कि करीब एक सप्ताह पहले सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का स्टाफ हरसूद से विधायक और मंत्री विजय शाह और उनके दोस्तों को निजी गाड़ियों से सिद्धबाबा पहाड़ी तक ले गया, जबकि टाइगर रिजर्व में निजी गाड़ियों का प्रवेश प्रतिबंधित है। यहां प्रतिबंध के बावजूद जंगल में चूल्हा जलाकर चिकन पार्टी की गई। इसका सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वन कर्मी मंत्री विजय शाह और उनके दोस्तों के लिए सिद्ध बाबा पहाड़ी प्रतिबंधित जगह पर चूल्हे पर चिकन, भरता और बाटी बनाते दिख रहे थे, जबकि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणी अधिनियम के तहत किसी भी तरह की आग जलाना प्रतिबंधित है।

वीडियो वायरल होने के बाद मामले को वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी दिल्ली को शिकायत की थी। इसमें उन्होंने टाइगर रिजर्व के अधिकारी कृष्णमूर्ति पर गंभीर आरोप लगाकर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। एनटीसीए ने इस मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) ने फील्ड डायरेक्टर एल कृष्णमूर्ति से ही जांच रिपोर्ट मांगी है। यह जांच भी सवालों में आ गई है। दरअसल शिकायत में एल कृष्णमूर्ति पर ही आरोप है। अब जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि एक दो दिन में जांच पूरी हो जाएगी। केन्द्रीय वन मंत्रालय में भी वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन माना है। यह सब वन विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर वन कर्मियों की मौजूदगी में हुआ। जानकारों का कहना है कि अधिनियम के उल्लंघन पर तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।


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