‘आयुष्मान कार्ड’ का झांसा दे पहले फंसाया, फिर वसूले 50 हजार

बाराबंकी में पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर निजी अस्पताल में कराया था भर्ती

‘आयुष्मान कार्ड’ का झांसा दे पहले फंसाया, फिर वसूले 50 हजार

चन्द्र प्रकाश सिंह

  • आईजीआरएस पर पीड़ित अधिवक्ता ने लगाई न्याय की गुहार, जांच कागजों में उलझी
  • पीएम के स्वास्थ्य सेवा की सबसे महत्वाकांक्षी जनहित स्कीम पर निजी अस्पतालों की मनमानी
लखनऊ/ बाराबंकी। बेखौफ चल रहे निजी अस्पताल की मनमानी धड़ल्ले फलफूल रही है।मरीजों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत सुविधा देने का बोर्ड लगाकर नगदी वसूली जा रही है। साथ ही आयुष्मान कार्ड से इलाज खर्च निकालने का खुला खेल चल रहा है। ताजा मामला बाराबंकी शहर के देवा रोड स्थित एक प्राइवेट हास्पिटल, आस्था अस्पताल का है।
 
यहां से पीड़ित अमित कुमार शुक्ला निवासी लच्छीपुरवा डिगसिरी असंदरा थाना अंतर्गत का कहना रहा कि बीते वर्ष 04 सितंबर को पत्नि चांदनी उम्र 32 वर्ष को प्रसव पीड़ा होने पर आस्था हास्पिटल में भर्ती कराया था। जहां पर अस्पताल कर्मियों ने आयुष्मान कार्ड सुविधा देने की बात बताकर प्रसव पीड़ित महिला चांदनी के पति अमित शुक्ला को आश्वासन देकर भर्ती कर लिया। भर्ती होने के पश्चात अस्पताल कर्मियों ने पीड़ित परिजनों को बताया कि प्रसव में आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिल पायेगा।
 
ऐसा सुनते ही परिजनों के ऊपर आर्थिक बोझ के बादल मंडराने लगे। ऐसी परिस्थिति में पीड़ित परिजन आखिर कर भी क्या सकते थे, तो प्रसव से कराह रही पत्नी की स्थिति देखकर अस्पताल के नियमों के आगे नतमस्तक हो गये। वहीं पीड़ित परिजन अमित शुक्ला ने आस्था अस्पताल पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में पत्नी को भर्ती कराया और हास्पिटल द्वारा 25 हजार का पैकेज लेने की बात कही और अस्पताल को 25 हजार रुपए कैश दे दिये। इसके अलावा यही नहीं अस्पताल कर्मियों ने अपनी मनमानी कर आयुष्मान कार्ड से दो किश्तों में करीब 80 हजार रुपए भी निकाल लिये। पीड़ित परिजन ने कहा कि जब इसकी जानकारी मोबाइल पर मैसेज आया तब हुई और भर्ती पत्नी के डिस्चार्ज होने पर पीड़ित परिजनों ने न्याय के लिए आईजीआरएस पर गुहार लगाई।
 
पीड़ित परिजनों ने संबधित विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि निजी अस्पताल ने 50 हजार रुपए कैश भी ले लिये और आयुष्मान कार्ड द्वारा इलाज करने के नाम पर 80 हजार रुपए भी निकाल लिये गये यह कहां का न्याय है। उन्होंने कहा कि आईजीआरएस की शिकायत सिर्फ कागजों पर घूमती रही और न्याय अभी तक नहीं मिला। अगर इसी भांति से निजी अस्पताल निरंकुश हो जायेंगे तो आम नागरिकों के साथ न जाने ऐसे कितने मामले कागजों में उलझ कर रह जाते और आम नागरिक विभाग पर से विश्वास टूट जाता है। जहां पेशे से अधिवक्ता न्याय की गुहार लगा रहा है तो कहीं न कहीं विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लग रहें हैं। ज्ञात हो कि आयुष्मान भारत योजना का कार्य प्रदेश की नोडल एजेंसी साची संभाल रही है। जिसका आयुष्मान कार्ड से लेकर आयुष्मान जनऔषधि केन्द्रों की निगरानी करती है।
 
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार बोले ...!
 
निजी अस्पताल में जो भी मनमानी का मामला हुआ है, उस पर जांच टीम गठित कर कार्रवाई की जायेगी।
  डॉ.बृजेश राठौर
 महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उप्र
 
मुझे अभी इस मामले की जानकारी नहीं है, यह कहकर फोन काट दिया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी बाराबंकी उप्र
 


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