विश्व एड्स दिवस पर कारागार में आयोजित हुआ जागरूकता शिविर

बहराइच । उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बहराइच के अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश उत्कर्ष चतुर्वेदी के निर्देश पर विश्व एड्स दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बहराइच के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विराट शिरोमणि की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला कारागार में ‘‘वैश्विक एकजुटता, साझा जिम्मेदारी’’ की थीम पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक राजेश यादव, डॉ. प्रवेश पाण्डेय, जेलर आनन्द कुमार शुक्ल, डिप्टी जेलर देवकान्त वर्मा, शेषनाथ यादव तथा बंदीगण उपस्थित रहे।

शिविर को सम्बोधित करते हुए सचिव श्री शिरोमणि द्वारा बताया गया कि एड्स से पीड़ित और प्रभावित लोगों के प्रति समर्थन दिखाने तथा एड्स जैसी वैश्विक बीमारी के कारण मृत्यु हुए लोगों को याद करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 01 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि शिविर आयोजन के पीछे भी यही उद्देश्य से है कि काराागार में निरूद्ध बन्दियों को एच.आई.वी. संक्रमण तथा एड्स जैसी जानलेवा बीमारियों के प्रति आगाह किया जा सके।

क्योंकि जागरूकता से ही इस बीमारी बचा जा सकता है। लोगों को जागरूक करने के मद्देनजर ही वर्ष 1992 से राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। उन्होंने बन्दियों का आहवान किया एड्स जैसी बिमारी से बचने हेतु सावधानी बरते तथा पूरी तरह से जागरूक रहें।
चिकित्सक डॉ. प्रवेश पाण्डेय ने बताया कि एड्स जैसी जानलेवा बीमारी एच.आई.वी. संक्रमण के कारण होती है। परन्तु हाथ मिलाने, एक ही थाली में भोजन करने अथवा छूने से नहीं इसका संक्रमण नहीं फैलता अर्थात यह छुआछूत की बीमारी नहीं है।

डॉ. पाण्डेय ने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करने, एक ही इंजेक्शन का कई व्यक्तियों में प्रयोग करने तथा अच्छे स्त्रोत से रक्त न चढ़ाने जैसे प्रमुख कारणों से इसका संक्रमण फैलता है। उन्होंने एच.आई.वी. संक्रमण के पश्चात मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। कोई भी व्यक्ति अच्छे खान-पान व नियमित दवा के सेवन से संक्रमित होने के बावजूद 20-25 साल तक जिंदा रह सकता है। डॉ. पाण्डेय ने बताया कि एड्स बीमारी का अब तक उपचार संभव नहीं हो सका है इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है।

जेल अधीक्षक राजेश यादव द्वारा बताया गया कि वर्तमान में कारागार में 17 बंदी एच.आई.वी. पीड़ित हैं। कारागार के प्रत्येक बैरक में एच.आई.वी./एड्स वॉलियण्टर्स नियुक्त किये गये हैं, जो बंदियों के मध्य जागरुकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। श्री यादव ने बताया कि 08 दिसम्बर को जिला कारागार में एच.आई.वी. के परीक्षण हेतु वृहद शिविर का आयोजन किया जायेगा। शिविर के पश्चात सचिव श्री शिरोमणि ने एच.आई.वी. संक्रमित बन्दियों से भेंट कर उनका कुशल क्षेम जाना तथा नियमित रूप से जिला चिकित्सालय के माध्यम से दवा प्राप्त कर सेवन करते रहने का सुझाव दिया। तत्पश्चात सचिव ने यूटीआरसी स्पेशल कैम्पेन 2023 में शेष रह गये बंदियों से भेंट कर उनके मुकदमों में तारीखों एवं जमानतों के संबंध में पूछताछ कर उन्हें आवश्यक कानूनी जानकारी भी प्रदान की।

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