अब शहीदों के बच्चों के पीछे पड़ी सरकार, बच्चों के फंड में की गई कटौती

नई दिल्ली। नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने केन्द्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें शहीदों के बच्चों के फंड में कटौती की गई है। इसके लिए नौसेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को एक खत भी लिखा है।

एडमिरल सुनील लांबा ने अपने खत में लिखा कि देश के लिए जान देने वाले जवानों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा प्रतिपूर्ति में कटौती के फैसले को सरकार वापस ले। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी ये सिफारिस मान लेगी तो देश की जनता को लगेगा कि सरकार शहीदों के बलियान को याद रखती है और उनके परिवार का ख्याल रखती है।

अब तक क्या था नियम?
1971 युद्ध के बाद से सरकार ने एक नया पेश किया था। इस नियम के तहत अगर कोई जवान ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाता, लापता होने या दिव्यांग होने पर उसके बच्चों के स्कूल, हॉस्टल, ट्यूशन, किताब, कपड़ों आदि का खर्च सरकार उठाती थी।
हाल ही में सरकार ने नया फैसला लिया, जिसके बाद से अब ये खर्च 10 हजार तक सीमित हो गया है। सरकार का ये आदेश 1 जुलाई से लागू है। वहीं सरकार के इस आदेश से जवानों के 3400 बच्चे प्रभावित हुए हैं। अब नौसेना प्रमुख चाहते हैं कि सरकार पुरानी व्यवस्था को लागू कर दे ताकि जवानों के परिजनों को राहत मिले।

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