रेशमी कपड़े पहनकर न जलायें पटाखे, बच्चों को दीयों से रखें दूर—डॉ0 ठाकुर

लखनऊ। साल भर के काफी इंतजार के बाद खुशियों का त्योहार दीपों का पर्व दीपावली आता है। इस अवसर पर बच्चे और बडे़ मिठाइयों, पटाखों और दीयों की रौशनी का खूब आनन्द उठाते हैं। लेकिन काफी इंतजार के बाद मनाने को मिला यह त्योहार खुशियों के बजाय दुख में न बदल जाये, इस बात का हमे पूरा ध्यान रखना चाहिए।

दीपावली पर्व पर असावधानीपूर्वक जमकर पटाखे जलाना और इस दौरान रेशमी परिधान धारण करना हमारी खुशियों को दुख में बदल सकता है। यही कारण है कि पटाखे जलाने के दौरान रेशमी कपड़ों को न पहनने की सलाह दी जाती है। इस दौरान बच्चों के लिए भी हमे काफी सजग रहना पड़ता है। थोड़ी सी असावधानी से हम पटाखों से अपने शरीर को काफी नुकसान पहुंचा लेते हैं। यही कारण है कि राजधानी के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. ठाकुर दीपावली पर्व पर पटाखों से बच्चों को दूर रखने की सलाह देते हैं। वहीं उनका कहना है कि पटाखे जलाने के दौरान लोगों को रेशमी कपडे़ नहीं पहनने चाहिए।

दीपावली पर्व को पूर्ण खुशियों के साथ मनाने और इस अवसर पर पटाखों से जलने की स्थिति में सबसे पहले क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के दृष्टिकोण से पहले तो पटाखे जलाने ही नहीं चाहिए। लेकिन यदि आपका मन नहीं मानता है तो पटाखे जलाने के दौरान रेशमी कपडे़ न पहने, इलेक्ट्रिक पोल के नजदीक पटाखे न जलाने, दीया नजदीक न रखने जैसी तमाम सावधानियां बरतनी चाहिए। पटाखे जलाने के दौरान बच्चों को अकेले न छोडे़, उनके नजदीक दीया न रखें। बच्चे यदि पटाखे जला रहे हैं तो उन्हें पैरेन्ट्स की निगरानी में पटाखे जलाने चाहिए।

डॉ. ठाकुर कहते हैं कि पटाखों से जलने के बाद घबराना नहीं चाहिए। उनका कहना है कि जले हुए भाग को तत्काल नल के नीचे रखना चाहिए, उसे कूल डाउन करना चाहिए। उसे ठण्डे माहौल में ले जाना और टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना चाहिए। जलने के बाद मंजन का पेस्ट लगाना उस पर बर्फ मलने को डॉ. ठाकुर सही इलाज नहीं बताते हैं। चेहरे और आखां में पटाखे से जलने को गंभीरता से लेते हुए इंतजार नहीं इलाज की दिशा में बढ़ना चाहिए।

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