भविष्य के AC नहीं फेंकेंगे हवा लेकिन तकनीक खींच लेगी आपके शरीर की गर्मी

Published By Tarunmitra
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नई दिल्ली। रेडिएंट कूलिंग सिस्टम को भविष्य के एसी कहा जाता है। एक ऐसी तकनीक जिसमें आपके शरीर को ठंडा रखने के लिए एसी की चिल्ड हवा नहीं चाहिए होगी। इस तकनीक में बिल्डिंग के अंदर पानी की पाइपलाइनें बिछाकर उनमें पानी बहाया जाएगा जो बिल्डिंग को प्राकृतिक रूप से ठंडा करेगा। यह तकनीक व्यक्ति के शरीर की गर्मी खींचकर उसे बिना हवा फेंके ठंडक पहुंचाएगी। 

आज की दुनिया में गर्मियों से बचने का सबसे बेहतर उपाय एयर कंडीशनर यानी एसी हैं। लेकिन भविष्य में रेडिएंट कूलिंग सिस्टम (Radiant Cooling System) बड़े पैमाने पर इनकी जगह ले सकता है। रेडिएंट कूलिंग सिस्टम को भविष्य में एसी का विकल्प कहा जा रहा है। यह मौजूदा एसी की तरह हवा नहीं फेकेंगे, बल्कि इंसान के शरीर से गर्मी खींचकर उसे कूलिंग पहुंचाएंगे। अमेरिका में इनका उपयोग किया जाने लगा है, लेकिन अभी सीमित है। आइए जानते हैं यह तकनीक क्या है। कैसे काम करती है और इसका फायदा क्या होगा?

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नॉर्मल AC के काम करने का तरीका 
रेडिएंट कूलिंग सिस्टम के बारे में जानने से पहले आपको नॉर्मल एसी की फंक्शनिंग को समझना होगा। laist की रिपोर्ट के अनुसार, आजकल उपयोग होने वाले एसी में सारी जिम्मेदारी रेफ्रिजरेंट की होती है जिसे आम बोलचाल में एसी की गैस कहा जाता है। ​

इसकी मदद से एसी कमरे की गर्म हवा को खींचकर बाहर फेंकता है और सूखी ठंडी हवा को कमरे में फेंकता है। यह काम तभी होता है जब घर में बिजली हो। और एसी को चलाने में बहुत अधिक बिजली खर्च होती है।
इसके अलावा एसी को गैस हमारे पर्यावरण के लिए भी अच्छी नहीं होती और जितने अधिक एसी चलते हैं, गर्मी उतनी ही बढ़ती है।

क्या है रेडिएंट कूलिंग सिस्टम? 
रेडिएंट कूलिंग सिस्टम में एसी और गैस जैसी कोई मशीन नहीं होती, बल्कि ठंडे पानी को फर्श, दीवारों और छतों में बिछाए गए पाइपों में घुमाया जाता है। आसान भाषा में समझाएं तो जहां भी रेडिएंट कूलिंग सिस्टम का उपयोग होता है, वहां दीवारों, फर्श और छतों के अंदर पानी के पाइप होते हैं, जिनसे होकर ठंडा पानी गुजरता रहता है।

वही ठंडा पानी दीवारों, छतों और फर्श को ठंडा रखता है।
जब कोई व्यक्ति उस जगह पर होता है तो उसके शरीर की गर्मी ठंडे पैनलों की ओर खिंची चली जाती है।
व्यक्ति को सामान्य रूप से ठंडक का एहसास होता है। अमेरिका में एक ट्रेन स्टेशन के अलावा कुछेक बिल्डिंग में इसी तकनीक की मदद से ठंडक पाई जा रही है। 

कंक्रीट के बने पार्किंग बेसमेंट का एहसास 
रिपोर्ट के अनुसार, रेडिएंट कूलिंग सिस्टम में सामान्य रूप से ठंडक का एहसास होता है। अगर आप कभी किसी बिल्डिंग के पार्किंग बेसमेंट में गए होंगे तो आपको तापमान बाहर से कम फील हुआ होगा। रेडिएंट कूलिंग सिस्टम में इसी तरह की ठंडक मिलती है। इसे और कारगर बनाने के लिए पंखे वगैरह लगाए जा सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, हवा की तुलना में पानी 3400 गुना अधिक गर्मी को सोख सकता है। इसी वजह से रेडिएंट कूलिंग तकनीक को पारंपरिक एसी सिस्टमों से अधिक एनर्जी एफिशिएंट माना जा रहा है। 

अभी कितना आ रहा खर्च 
रेडिएंट कूलिंग सिस्टम पर रिसर्च भी हुई हैं जो बताती हैं कि यह पारंपरिक एसी से ज्यादा आरामदायक फील कराते हैं। हालांकि अभी अमेरिका में ही इस सिस्टम को घरों में लगाने का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है।

इसकी एक वजह लोगों को कम जानकारी होना है। ठेकेदारों को भी इस तकनीक के बारे में नहीं पता।
इसकी कॉस्ट भी अधिक है। प्रति स्क्वॉयर फीट पर लगभग 20 डॉलर यानी 180 रुपये तक का खर्च आता है। 

क्या भारत में सफल होगी तकनीक? 
अमेरिका के मुकाबले भारत में ज्यादा गर्मी पड़ती है। मई-जून के महीनों में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। रेडिएंट कूलिंग सिस्टम बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाए तो इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। लेकिन इसका इंफ्रास्ट्रक्चर अभी शुरुआती चरण में है। लोगों को तकनीक के बारे में जानकारी नहीं है। भविष्य में अगर यह तकनीक अपग्रेड और सस्ती होती है, भारत में एसी के विकल्प के रूप में इसे अपनाया जाना चाहिए। इमेज क्रेडिट: इंडियामार्ट

 

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‘तरुणमित्र’ श्रम ही आधार, सिर्फ खबरों से सरोकार। के तर्ज पर प्रकाशित होने वाला ऐसा समचाार पत्र है जो वर्ष 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जैसे सुविधाविहीन शहर से स्व0 समूह सम्पादक कैलाशनाथ के श्रम के बदौलत प्रकाशित होकर आज पांच प्रदेश (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड) तक अपनी पहुंच बना चुका है। 

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