प्राचीन पांडुलिपियां अतीत की जीवित आवाज, इनके संरक्षण से अगली पीढ़ी तक पहुंचेगी ज्ञान की विरासत
प्रतापगढ़ में पांडुलिपियों की चित्र प्रदर्शनी एवं व्याख्या माला का आयोजन, डीएम अभिषेक पाण्डेय ने किया उद्घाटन
प्रतापगढ़। भारतीय ज्ञान, चिंतन-परंपरा, कला और संस्कृति इतनी अधिक प्राचीन है कि इसे ज्यादा प्राचीन और पूर्ण संस्कृति विश्व में दूसरी कोई नहीं है। अपनी विरासत को संरक्षित करने का जुनून ही इस महान संस्कृति का वाहक है। उक्त विचार जिला अधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने मंगलवार को प्रताप बहादुर पीजी कॉलेज और राजकीय पाण्डुलिपि पुस्ताकलय (संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश) प्रयागराज के संयुक्त तत्ववधन में अयोजित पाण्डुलिपियों की चित्र प्रदर्शिनी एवं व्याख्या माला का उद्घाटन करते समय कहीं।
उन्होंने कहा कि किसी ग्रंथ का लुप्त हो जन संस्कृति के एक अध्याय की मृत्यु के समान होता है। प्राचीन ग्रंथों व पंडुलिपियों के संरक्षण द्वारा ही हम ज्ञान की विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्षम हो सकते हैं। उन्होंने इस विरासत को बचाने के लिए युवाओं और आमजनों से आगे आने की अपील की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता और कॉलेज के प्रबंधक राजा अनिल प्रताप सिंह ने कहा की पांडुलिपियां अतीत के पृष्ट मात्रा नहीं है वे समय की जीवित आवाजें हैं जिनसे हम अपनी सभ्यता को न केवल जान सकते हैं बल्कि उसे नए अर्थों में समझ सकते हैं। ये अतीत की निष्क्रिय वास्तुएं नहीं हैं, उनके अक्षरों में युग की आवाज और पृष्ठों में समाज की स्मृति है। उन्होंने कहा की ये प्रदर्शनी केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि ज्ञान, स्मृति और भविष्य के बीच संवाद का एक महत्तवपूर्ण अवसर है। कार्यक्रम में उपस्थित क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी राकेश कुमार वर्मा ने अभिलेखऔर पांडुलिपियों के संरक्षण और सर्वेक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि वर्तमान समय एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का संरक्षण और सर्वेक्षण कार्य संपादित हुआ है, जिसमें प्रतापगढ़ के किसान आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अनेक दस्तावजों का भी सर्वेक्षण किया गया है। राजकीय पांडुलिपि पुस्तकाय के हंसचंद्र दुबे जी ने युवाओं और आमजन से अपील की कि यदि किसी भी व्यक्ति की जानकारी में इस प्रकार की हस्तलिखित प्राचीन पांडुलिपियां अथवा दस्तावेज उपलब्ध हों तो उन्हें संरक्षित करने के लिए जानकारी प्रदान करें जिसे उनके महत्व को नष्ट होने से बचाया जा सके।
इस अवसर पर उपस्थित भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्राचीन विरासत को संजो कर रखना किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी न होकर सम्पूर्ण समाज की जिम्मेदरी है। अतिथियों का स्वागत प्रो. रामराज, प्रो. ब्रह्मानंद प्रताप सिंह, प्रो. राजीव सिंह, पीबी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अनूप सिंह ने किया। कार्यक्रम का संयोजन प्राचीन इतिहास विभाग की सहायक आचार्य और इतिहास संकलन समिति की अध्यक्षा डॉ. अमृता सिंह द्वारा किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का आभार ज्ञापन प्राचार्य प्रो. आमित कुमार श्रीवास्तव द्वारा तथा संचालन देवेश सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. पीयूषकान्त शर्मा, डॉ.के. के.सिंह, डॉ. रवि प्रताप सिंह, डॉ. नीरज त्रिपाठी, नीरज पाण्डेय, रचना सिंह, चंद्रमा सिंह, प्रभादीप कौर साहित महाविद्यालय और पीबी इंटर कॉलेज के समस्त स्टाफ और छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।
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लेखक के बारे में
ब्रजेश त्रिपाठी को पत्रकारिता क्षेत्र में 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन और संपादन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के व्यूरो प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं।
