केजीएमयू: हेमेटोलॉजी में मरीज के तीमारदार से अभद्रता का आरोप
— जूनियर डॉक्टर बरकत की शिकायत उच्च स्तर तक
— मरीज शैलेश दुबे की महिला रिश्तेदार ने लगाया दुर्व्यवहार का आरोप
— विभागाध्यक्ष डॉ. सीएल. वर्मा और बाकी टीम के व्यवहार की सराहना
लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ,केजीएमयू के हेमेटोलॉजी विभाग में एक मरीज के तीमारदार के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि 25 अगस्त की रात हेमेटोलॉजी विभाग में उपचाराधीन मरीज शैलेश दुबे की एक महिला रिश्तेदार के साथ जूनियर डॉक्टर बरकत ने बातचीत के दौरान अनुचित और अपमानजनक व्यवहार किया। मामले की शिकायत अब विश्वविद्यालय प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाए जाने की तैयारी है। परिजनों का कहना है कि मरीज के इलाज से जुड़े सवाल पूछने और जानकारी लेने के दौरान डॉक्टर का व्यवहार ऐसा नहीं था, जिसकी किसी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के चिकित्सक से अपेक्षा की जाती है।
पहले भी व्यवहार को लेकर शिकायतें होने का दावा
सूत्रों का दावा है कि संबंधित जूनियर डॉक्टर के व्यवहार को लेकर इससे पहले भी कुछ मरीजों और तीमारदारों ने असंतोष जताया है। हालांकि इन पूर्व शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह भी देखा जाए कि क्या पूर्व में भी संबंधित चिकित्सक के खिलाफ किसी प्रकार की मौखिक अथवा लिखित शिकायत दर्ज हुई है।
यदि किसी चिकित्सक के व्यवहार को लेकर बार-बार शिकायतें सामने आ रही हैं तो इसे केवल व्यक्तिगत विवाद मानकर नजरअंदाज करने के बजाय पेशेवर आचरण, संवाद शैली और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के स्तर पर समीक्षा किया जाना आवश्यक है।
डॉ. सी.एल. वर्मा और विभाग की टीम की सराहना
परिजनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह शिकायत पूरे हेमेटोलॉजी विभाग अथवा उसकी कार्यप्रणाली के खिलाफ नहीं है। विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक एवं डॉ. सी.एल. वर्मा के व्यवहार, मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और चिकित्सकीय मार्गदर्शन की उन्होंने सराहना की है।
उनका कहना है कि विभाग की अधिकांश चिकित्सकीय टीम बेहद सहयोगी, संवेदनशील और मरीजों की समस्या को समझने वाली है। ऐसे प्रतिष्ठित विभाग की छवि किसी एक व्यक्ति के कथित अनुचित व्यवहार के कारण प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति से मांग की जा रही है कि संबंधित पक्षों का बयान लेकर घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ संबंधित डॉक्टर को मरीजों एवं तीमारदारों से संवाद के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं। चिकित्सा केवल दवा और उपचार तक सीमित नहीं है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिजन पहले ही मानसिक एवं भावनात्मक दबाव में होते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की भाषा, व्यवहार और संवेदनशीलता भी उपचार व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
