राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश शंखधार के नाम पर हो बदायूं के नवनिर्मित ऑडिटोरियम का नामकरण
बदायूं। राष्ट्रीय गीतकार एवं सुविख्यात साहित्यकार स्वर्गीय डॉ. उर्मिलेश शंखधार की 75वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे 'डॉ. उर्मिलेश अमृत महोत्सव' के अंतर्गत डॉ. उर्मिलेश जनचेतना समिति के सचिव डॉ अक्षत शंखधार ने पूर्व मंत्री आबिद रजा को प्रार्थना पत्र सौंपकर बदायूं नगर में नव निर्मित ऑडिटोरियम का नामकरण डॉ. उर्मिलेश प्रेक्षागृह किए जाने की मांग की है।
समिति के सचिव डॉ अक्षत शंखधार ने अपने पत्र में कहा कि डॉ. उर्मिलेश शंखधार हिंदी साहित्य जगत के ऐसे विलक्षण रचनाकार थे, जिनकी कृतियां आज भी विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं तथा उनके साहित्य पर देशभर में शोध कार्य किए जा रहे हैं। मंचीय काव्य पाठ, ओजस्वी व्यक्तित्व और जनचेतना से ओत-प्रोत रचनाओं के माध्यम से उन्होंने हिंदी साहित्य, समाज और संस्कृति को अमूल्य योगदान दिया। उनका व्यक्तित्व साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का पर्याय था। समिति ने बताया कि डॉ. उर्मिलेश के निधन के बाद उनकी स्मृतियों को सहेजने और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के उद्देश्य से डॉ. उर्मिलेश जनचेतना समिति का गठन किया गया। पिछले दो दशकों में समिति द्वारा उनके दो काव्य संग्रह प्रकाशित कराए गए, सार्वजनिक पुस्तकालय एवं वाचनालय की स्थापना की गई, दो ऑडियो सीडी जारी की गईं तथा विराट बदायूं महोत्सव सहित अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं शैक्षिक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया।
प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया कि 6 जुलाई 2026 से 5 जुलाई 2027 तक डॉ. उर्मिलेश का अमृत महोत्सव वर्ष मनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत वर्षभर विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समिति ने यह भी स्मरण कराया कि पूर्व में आबिद रजा द्वारा बदायूं क्लब के मुख्य द्वार का निर्माण कर उसे डॉ. उर्मिलेश की स्मृति को समर्पित किया गया था, जिसके लिए साहित्य जगत सदैव उनका आभारी रहेगा।
समिति ने आग्रह किया कि जनपद मुख्यालय स्थित डायट परिसर में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा निर्मित तथा वर्तमान में नगर पालिका परिषद बदायूं के प्रबंधनाधीन प्रेक्षागृह का नामकरण यदि 'डॉ. उर्मिलेश प्रेक्षागृह' किया जाता है, तो यह उनके अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर साहित्य और संस्कृति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इससे बदायूं की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां भी महान साहित्यकार के योगदान से प्रेरणा प्राप्त करेंगी। समिति ने आशा व्यक्त की कि आबिद रजा इस मांग को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर आवश्यक पहल करेंगे, जिससे जिले के साहित्यकारों, संस्कृति प्रेमियों और नागरिकों की लंबे समय से चली आ रही भावना को सम्मान मिल सके। पूर्व मंत्री आबिद रज़ा ने कहा कि शीघ्र ही राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश शंखधार के नाम से नवनिर्मित ऑडिटोरियम के लिए चेयरपर्सन फात्मा रज़ा से बात करेंगे।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले शारिक नसीर वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के बदायूं ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज के साथ वह लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
