दरगाह की जमीन पर कब्जे का खेल! मजार के नाम पर फर्जीवाड़ा
मजार के नाम पर फर्जी रसीदें छापकर वसूली के आरोप, डीएम तक पहुंचा मामला
मनोज शर्मा
- मोटरसाइकिल मिस्त्री से मजार का मुज़ौर तक… अब फर्जी रसीदों से वसूली के आरोप, आफताब पर उठे गंभीर सवाल”
बाराबंकी। मसौली थाना क्षेत्र के ग्राम सुरसंडा स्थित प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम शाह अब्दुल करीम शाह की मजार को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। दरगाह की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश, मजार के नाम पर फर्जी रसीदें बनाकर कथित अवैध वसूली और मुतवल्ली के अधिकार को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत में खास तौर पर मुज़ौर आफताब समेत कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं ग्रामीणों का कहना है कि आफताब पहले मोटरसाइकिल की मरम्मत का काम करता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह काम छोड़कर मजार से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय है। आरोप है कि इसी दौरान मजार के नाम पर कथित रूप से रसीदें छपवाकर लोगों से रकम वसूली जाने लगी।शिकायतकर्ता का आरोप है कि मुज़ौर आफताब व उसके साथियों द्वारा खुद को दरगाह से जुड़ा बताते हुए कथित रूप से आम लोगों से धन लिया जा रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित लोगों के पास मुतवल्ली होने का कोई वैध दस्तावेज अथवा न्यायालय का आदेश नहीं है।
शिकायतकर्ता ने कथित रसीदें अपने पास होने का दावा करते हुए प्रशासन से उनकी जांच कराने की मांग की है। आरोप यह भी है कि मजार पर झाड़-फूंक और अंधविश्वास के नाम पर आने वाले लोगों से भी कथित तौर पर रकम वसूली जाती है।शिकायतकर्ता और ग्रामीणों के मुताबिक दरगाह की देखरेख के लिए वक्फ संख्या 127 से संबंधित कमेटी मौजूद है। आरोप है कि इसके बावजूद मुज़ौर आफताब और अन्य लोग कथित रूप से कमेटी की व्यवस्था को दरकिनार कर मजार के नाम पर अलग से रसीद जारी कर वसूली कर रहे हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दरगाह की देखरेख से संबंधित जमीन पर कुछ लोगों की नजर है और वहां खेती करने वाले बटाईदारों पर दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि बटाईदारों को धमकाकर उपज अथवा उससे मिलने वाली रकम को लेकर दबाव बनाया गया। विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से दरगाह की जमीन के अभिलेखों, वक्फ कमेटी की वैधता, कथित रसीदों, मुतवल्ली के अधिकार और मजार के नाम पर हुई कथित वसूली की जांच कराने की मांग की है। साथ ही आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है।
हालांकि, मुज़ौर आफताब और अन्य आरोपित पक्ष का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है। लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित रसीदें वैध हैं या नहीं और दरगाह की जमीन व मजार की व्यवस्था पर वास्तविक अधिकार किसका है।अब निगाहें प्रशासन की जांच पर हैं कि दरगाह की जमीन और मजार के नाम पर कथित वसूली के इस विवाद में आखिर सच्चाई क्या है।
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
