विधानसभा चुनाव: माननीयों के लिए चुनावी डोज बनीं रोडवेज बसें!
2027 की चुनावी सुगबुगाहट के बीच क्षेत्रों में नेताओं की चहलकदमी बढ़ी
रवि गुप्ता
- रोडवेज मुख्यालय पहुंच रहे माननीय, अपने क्षेत्रों में बस संचालन पर दे रहे जोर
- परिवहन सुविधाओं के जरिए जनता के बीच पकड़ मजबूत करने की कोशिश
- मुख्यालय आने वालों में भाजपा विधायकों की संख्या अधिक, अन्य दलों के नेता भी सक्रिय
लखनऊ। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। चाहे पूर्ण बहुमत से लगातार दूसरी बार यूपी की सत्ता पर काबिज बीजेपी की योगी सरकार हो या फिर प्रमुख विरोधी दलों में समाजवादी पार्टी और उसके बाद कांग्रेस व बसपा हो, या फिर चाहे सरकार हो या किसी भी पार्टी का संगठन सभी ने अपने-अपने तौर-तरीके से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
ऐसे में प्राय: यही देखने को मिलता है कि अभी तक सूबे में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो, जब भी उसके शासनकाल का अंतिम दौर होता है और नया चुनावी माहौल करीब होता है तो वो तमाम तरह के लोक-लुभावन व जन आकर्षक योजनाओं का ऐलान करना शुरू करती है या फिर कुछ पुरानी और लंबित पड़ी स्कीमों को नया नाम देकर उसे जनता-जनार्दन के बीच खूब प्रचारित और प्रसारित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती।
उदाहरण स्वरूप इसकी ताजा बानगी हाल ही में संपन्न हुए यूपी विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किये गये अनुपूरक बजट के तहत सीधे आमजन से जुड़े कुछ अहम सरकारी विभागों व वरिष्ठ महिलाओं, बच्चों के कल्याणार्थ अच्छा-खासा बजट पास कराना और फिर इसे अपने हिसाब से ठीक चुनावी समर से पहले धीरे-धीरेकरके जमीन पर क्रियान्वित करना। ऐसे में इन दिनों कुछ ऐसा ही मोल-तोल वाला माहौल यूपी रोडवेज मुख्यालय पर देखने को मिल रहा है, जहां पर आये दिन प्रदेश भर से विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के मौजूदा विधायकों से लेकर तमाम क्षेत्रीय नेतागणों का यहां बराबर आना-जाना हो रहा है और इन सबकी निगम मुख्यालय प्रबंधन से एक ही डिमांड है कि हमारे क्षेत्र में जो भी रोडवेज बसें पहले से पास हैं, अगर वो किसी कारणवश नहीं संचालित नहीं हो सकी हैं तो उनका अविलंब संचालन शुरू करा दिया जाये...या फिर नये सिरे से कुछ खास और प्रमुख रूटों पर नई रोडवेज बसें चला दी जायें जिससे कि वो क्षेत्रीय जनता के बीच आगामी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले कुछ कामकाज तो गिना सकें।
जानकारी के तहत गत गुरुवार को ही मिजार्पुर मंडल के किसी एक क्षेत्र की भाजपा महिला विधायक सीधे एमडी रोडवेज के पास पहुंचीं और अपने क्षेत्र के किसी एक खास रूट की बस संचालन को लेकर अहम जानकारी मांगने लगी जिसके बाद प्रबंध निदेशक ने अधीनस्थ अधिकारियों को इसकी जानकारी देने को कहा। इससे पहले सिद्धार्थनगर क्षेत्र के एक विधायक अपने यहां के एक निमार्णाधीन बस अड्डे को जल्द से जल्द पूरा कराने की प्रस्ताव लेकर निगम मुख्यालय पहुंचे थे। ऐसे ही चंदौली, बनारस और पश्चिम में मेरठ, कानपुर आदि के भी तमाम नेतागण लगभग हर दिन रोडवेज मुख्यालय आना जाना लगाये हुए हैं, ताकि बसों का संचालन शुरू करा सकें।
कुछ नेतागण जो अक्सर परिवहन मंत्री के साथ कार्यक्रमों में आते जाते हैं और लखनऊ आना जाना लगा रहता है तो वो सीधे रोडवेज प्रबंधन के समक्ष मुख्यमंत्री ग्राम सड़क परिवहन योजना का हवाला देते हुए कहते हैं कि यह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, इसके तहत तो 36 सीटर छोटी बसें चलायी ही जा सकती हैंं।?जबकि निगम मुख्यालय पर संचालन से जुड़े उच्चाधिकारी दबे जुबां आपस में यही बात कर रहे हैं कि आखिर में एक साथ कैसे अलग-अलग लेवल पर इन नेताओं के मनमाफिक बसों का संचालन बिना किसी फीडबैक के कैसे शुरू करा दिया जाये।
बता दें कि आज की तारीख में पूरे देशभर में यूपी रोडवेज किसी भी राज्य के सार्वजनिक सड़क परिवहन निगम सेवा में सबसे बड़ा कॉरपोरेशन है और इसकी बेड़े में 14 हजार 319 बसें (अनुबंधित बसें मिलाकर) हर दिन तकरीबन 45 लाख किलोमीटर का सफर तय करते हुए हर रोज लगभग 17 से 18 रोडवेज मुसाफिरों को उनके गंतव्य स्थानों तक पहुुंचाने का काम करती हैं। ऐसे में यूपी रोडवेज की हर दिन आमजनता के बीच चलती-फिरती और सड़कों पर दौड़ती पब्लिक इमेज के जरिये कहीं न कहीं और किसी न किसी रूप में विधायकगण, नेतागण कम समय में अधिक से अधिक भुनाना चाहते हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
