24 लाख की सरकारी मदद से गूंजी 4 मूकबधिर बच्चों की किलकारी,कॉक्लियर इम्प्लांट से मिली आवाज
जनता दर्शन में डीएम से परिजनों ने लगाई थी गुहार,त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई से चार मासूमों का हुआ सफल ऑपरेशन
मुजाहिद खां
रामपुर:बचपन से ही खामोशी के साये में जी रहे चार मासूम बच्चों की जिंदगी अब पूरी तरह बदल गई है । जन्म से ही सुनने और बोलने में असमर्थ इन बच्चों के लिए प्रदेश सरकार की कॉक्लियर इम्प्लांट योजना किसी संजीवनी से कम साबित नहीं हुई है।जनता दर्शन में परिजनों की फरियाद पर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने तत्काल संज्ञान लिया और प्रशासन की मुस्तैदी से चारों बच्चों का विशेषज्ञ अस्पतालों में सफल ऑपरेशन कराया गया।इस पूरी प्रक्रिया में राज्य सरकार की ओर से प्रति बच्चा लगभग 6 लाख रुपये (कुल 24 लाख रुपये) वहन किए गए।अब ये चारों बच्चे न सिर्फ सुन पा रहे हैं,बल्कि बोलने भी लगे हैं।बच्चों की इस नई जिंदगी से उनके परिवारों में जश्न का माहौल है।
जनता दर्शन में छलका था माता-पिता का दर्द
तहसील स्वार के ग्राम ननकार सेडू की अमायरा,रायपुर चुन्नावाला के उवैश खान,मोहल्ला खास की अजवानूर और तहसील शाहबाद के ग्राम नरेन्द्रपुर निवासी निशांत के माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थे।वे अपनी इस गहरी पीड़ा को लेकर बीते दिनों जिलाधिकारी के पास जनता दर्शन में पहुंचे।डीएम ने परिजनों की व्यथा को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना और उन्हें दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित योजना की जानकारी देते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
तुरंत एक्शन और इलाज की मिली संजीवनी
जिलाधिकारी की संवेदनशीलता के चलते मामले में तत्काल एक्शन लिया गया।उन्होंने जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी सुश्री प्रतिभा पाल को निर्देशित किया कि इन पात्र बच्चों का चयन कर जल्द से जल्द इलाज सुनिश्चित कराया जाए।कॉक्लियर इम्प्लांट योजना के तहत 0 से 5 वर्ष तक के मूकबधिर बच्चों के लिए 6 लाख रुपये तक के निशुल्क इलाज का प्रावधान है।प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन में चारों बच्चों को बिना समय गंवाए विशेषज्ञ अस्पतालों में भेजा गया,जहां प्रदेश सरकार के खर्च पर उनकी सफलतापूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी पूरी की गई।
डीएम ने बच्चों को दुलारा,दी उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं
सर्जरी के बाद जब ये बच्चे अपनी नई आवाज और सुनने की क्षमता के साथ दोबारा जनता दर्शन में जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे,तो वहां का नजारा बेहद भावुक और सुखद था।जो बच्चे कुछ समय पहले तक अपनी दुनिया में खामोश थे,उनकी नई प्रतिक्रियाएं देखकर हर कोई खुश था।जिलाधिकारी ने इन नौनिहालों को बड़े स्नेह से पुचकारा और उनके बेहतर भविष्य की कामना की।यह पहल इस बात का सटीक उदाहरण है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं का सही तालमेल हो,तो समाज के जरूरतमंद तबके और दिव्यांग बच्चों को भी मुख्यधारा में लाकर उनके जीवन को रोशन किया जा सकता है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
