कैसे पता करें कौन सा ग्रह है सबसे शक्तिशाली?
षड्बल : ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के सबसे मजबूत ग्रह का पता करने के लिए षड्बल जानना बेहद जरूरी होता है। षड्बल के जरिए हमें पता चलता है कि कौन सा ग्रह कुंडली में सबसे अधिक बलवान है। षड्बल में जो भी ग्रह बली या शक्तिशाली होता है उसकी महादशा के दौरान बेहद शुभ परिणाम व्यक्ति को मिलते हैं। साथ ही षड्बल में मजबूत ग्रह अगर कुंडली में कमजोर भी दिख रहा हो तब भी वो अच्छे परिणाम दे सकता है। वहीं कुंडली में उच्च का ग्रह भी अगर षड्बल में कमजोर हो तो उसके शुभ फल मिलने में देरी हो सकती है। आइए अब जानते हैं कि षड्बल का पता कैसे किया जाता है।
षड्बल
सरल भाषा में कहा जाए तो षड्बल का अर्थ है 6 प्रकार की शक्तियां। षड्बल को जानकर कुंडली के मजबूत और कमजोर ग्रह का पता लगाया जाता है। षड्बल के अंतर्गत राहु-केतु को छोड़कर बाकी के 7 ग्रहों की शक्तियों का पता लगाया जाता है। षड्बल में मजबूत ग्रह अगर कुंडली में पीड़ित भी हो तब भी शुभ परिणाम प्रदान कर सकता है।
षड्बल के 6 स्तंभ
स्थान बल- कुंडली के किस भाव और राशि में ग्रह बैठा है इससे स्थान बल का पता चलता है। कुंडली में ग्रह मूलत्रिकोण, उच्च राशि, स्वराशि, मित्र राशि में है तो उसे स्थान बल प्राप्त होता है। इसके साथ ही केंद्र और त्रिकोण में बैठे ग्रहों को भी स्थान बल प्राप्त होता है।
दिगबल- इसे दिशा बल भी कहा जाता है। हर ग्रह की एक दिशा होती है और कुंडली में अगर ग्रह अपनी दिशा की ओर बैठा है तो उसे शक्तिशाली माना जाता है।
काल बल- जातक का जन्म दिन में या रात में हुआ है और पक्ष कौन सा था इससे काल बल का पता चलता है। सूर्य, गुरु, शुक्र को दिन के समय बलवान माना जाता है वहीं चंद्र, मंगल, शनि रात में बलवान होते हैं। बुध दोनों समय समान प्रभाव देते हैं।
चेष्टा बल- ग्रह की गति या चाल से चेष्टा बल का पता चलता है। ग्रह वक्री है मार्गी है यह देखना जरूरी होता है।
नैसर्गिक बल- ग्रहों का प्राकृतिक बल। सूर्य सबसे बलवान उसके बाद चंद्रमा, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और शनि। यह बल कभी नहीं बदलता।
दृग् बल- इसे दृष्टि बल भी कहा जाता है। कुंडली में जिस ग्रह पर गुरु, शुक्र जैसे शुभ ग्रहों की पूर्ण दृष्टि होती है उसे दृष्टि बल प्राप्त होता है। वहीं पापी ग्रहों जैसे राहु, शनि आदि की दृष्टि से नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।
कैसे पता करें कौन सा ग्रह है सबसे शक्तिशाली?
ऊपर बताए गए नियमों के अनुसार आपको कुंडली के सभी 7 ग्रहों को देखना है। हर बल का 1 अंक मिलता है जिस भी ग्रह को सबसे अधिक बल कुंडली में मिलते हैं वो सबसे शक्तिशाली माना जाता है। षड्बल में मजबूत ग्रह हमेशा अच्छे परिणाम देता है और महादशा के दौरान व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक रूप से बदल सकता है। अगर कोई ग्रह कुंडली में राजयोग बना रहा हो लेकिन षड्बल में सबसे कमजोर हो तो राजयोग का लाभ न के बराबर ही मिलता है। वहीं कुंडली में प्रतिकूल नजर आ रहा ग्रह अगर षड्बल में शक्तिशाली है तो अच्छे परिणाम अवश्य देगा।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
