कौशाम्बी में मिलावट का कारोबार बेखौफ! सरसों तेल से दूध तक मिलावट का खेल, नकली दवाओं की बिक्री पर भी सवाल
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, गांव-कस्बों के बाजारों में मानकों की अनदेखी के आरोप; नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
कौशाम्बी। जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट और मानकविहीन सामग्री की बिक्री को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर कस्बाई बाजारों तक मिलावटी सरसों तेल, दूध, खोवा, पनीर, मिठाई, घी समेत अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री की शिकायतें सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं नकली अथवा मानकविहीन दवाओं की बिक्री की आशंकाओं ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। आम लोगों का सवाल है कि आखिर उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़े इस गंभीर मामले में जिम्मेदार विभागों की निगरानी कितनी प्रभावी है।
दूध, तेल और दूध से बने उत्पादों पर नजर जरूरी
रोजमर्रा की जरूरत में शामिल दूध और उससे तैयार होने वाले खोवा, पनीर, मिठाई व अन्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत है। इसी तरह सरसों तेल और अन्य खाद्य तेलों की शुद्धता भी सीधे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ी है। लोगों का आरोप है कि कई बाजारों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पैकिंग, निर्माण एवं उपयोग की अंतिम तिथि तथा निर्धारित मानकों की पर्याप्त जांच के बिना बिक्री होने की आशंका बनी रहती है।
हालांकि किसी उत्पाद में मिलावट की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही की जा सकती है, लेकिन शिकायतों के बीच नियमित नमूना संग्रह और प्रभावी निगरानी की मांग तेज हो गई है।
त्योहारी सीजन में बढ़ जाती है चुनौती
त्योहारों और मांग बढ़ने के दौरान खोवा, पनीर, मिठाई, दूध, घी और खाद्य तेलों की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावट की रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि महज अभियान चलाने के बजाय नियमित बाजार निरीक्षण, संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने और प्रयोगशाला जांच की व्यवस्था लगातार जारी रहनी चाहिए।
नकली दवाओं का मामला और भी गंभीर
खाद्य पदार्थों के साथ दवाओं की गुणवत्ता का मामला भी बेहद संवेदनशील है। नकली या मानकविहीन दवा मरीज के उपचार को प्रभावित कर सकती है। इसलिए मेडिकल स्टोरों पर दवाओं की खरीद-बिक्री, बिल, लाइसेंस, बैच नंबर, निर्माण और वैधता अवधि की जांच नियमित रूप से किए जाने की जरूरत है।
लोगों का कहना है कि यदि कहीं नकली दवा की बिक्री की शिकायत सामने आती है तो औषधि विभाग को तत्काल जांच कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीण बाजारों में निगरानी तंत्र मजबूत करने की जरूरत
जिले के दूरदराज के गांवों और कस्बों में रहने वाले उपभोक्ताओं के पास खाद्य सामग्री की गुणवत्ता परखने के सीमित साधन होते हैं। ऐसे में सरकारी निगरानी तंत्र ही लोगों को मिलावट से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। स्थानीय लोगों ने ग्रामीण बाजारों में भी नियमित निरीक्षण और नमूना जांच बढ़ाने की मांग की है।
जांच के साथ कार्रवाई का असर दिखना जरूरी
लोगों का कहना है कि मिलावट के खिलाफ अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नमूने लिए जाने के बाद उनकी जांच, रिपोर्ट और मानक के विपरीत पाए जाने वाले उत्पादों पर नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़नी चाहिए। इससे मिलावट करने वालों में कानून का भय पैदा होगा और उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।
जनता ने की नियमित अभियान चलाने की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से गांवों एवं कस्बों में नियमित अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों के नमूने लेने, संदिग्ध उत्पादों की प्रयोगशाला जांच कराने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नकली दवाओं की शिकायतों की भी गंभीरता से जांच कराने की मांग उठी है। लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थ और दवाएं सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, इसलिए इनकी गुणवत्ता की निगरानी में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
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लेखक के बारे में
पिछले छह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय रोहित तिवारी कौशांबी में आधारित हैं और क्षेत्रीय मुद्दों की कवरेज में लगातार कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं।
