जेबीगंज-खीरी,21 अगस्त(तरुणमित्र)। पसगवां ब्लॉक के कस्बा जंगबहादुरगंज स्थित केन ग्रोवर इंटर कॉलेज की जर्जर इमारत में चल रहा शिक्षण कार्य छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। लंबे समय से जीर्ण-शीर्ण हालत में पड़ी भवन की दीवारों और छत से बरसात के दौरान पानी टपकने की समस्या बनी हुई है। भवन की स्थिति को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।
कॉलेज में करीब 2,075 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। ऐसे में जर्जर भवन में बड़ी संख्या में बच्चों का रोजाना शिक्षण कार्य के लिए पहुंचना किसी संभावित हादसे की आशंका को बढ़ा रहा है। विद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि भवन की स्थिति को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की प्रोजेक्ट ‘अलंकार’ योजना के तहत कॉलेज में छह नए कक्षों के निर्माण का प्रस्ताव है। योजना के तहत निर्माण लागत का 25 प्रतिशत अंशदान कॉलेज को स्वयं करना है, जबकि 75 प्रतिशत धनराशि शासन स्तर से उपलब्ध कराई जानी है। कॉलेज प्रशासन द्वारा आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर संबंधित दस्तावेज शिक्षा विभाग को भेजे जाने की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हुआ है।
कॉलेज परिसर के पीछे खाली पड़े मैदान में घास-बेलियां और झाड़ियां काफी बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां सांप और अन्य छोटे जीव दिखाई देने लगे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त चिंता बनी हुई है। साफ-सफाई के अभाव में परिसर का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से कॉलेज भवन का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक स्थायी निर्माण नहीं होता, तब तक कमजोर हिस्सों को सुरक्षित करने, आवश्यकता पड़ने पर कक्षाओं को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने और परिसर की साफ-सफाई कराने जैसे अस्थायी सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।
लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई विषय नहीं है। यदि भवन की स्थिति वास्तव में खतरनाक है तो किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए। अभिभावकों ने प्रोजेक्ट अलंकार के तहत प्रस्तावित छह कक्षों के निर्माण के लिए आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराकर कार्य शुरू कराने की मांग की है।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी तत्परता से लेते हैं और हजारों छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।