लखीमपुर-खीरी,21 अगस्त(तरुणमित्र)। लखीमपुर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिना पंजीकरण और जरूरी मानकों के संचालित किए जा रहे निजी अस्पतालों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई जगह अप्रशिक्षित लोगों द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा है और प्रसव जैसे संवेदनशील मामलों में भी जोखिम उठाया जा रहा है।
मामला तब और गंभीर हो जाता है जब ऐसे अस्पतालों में डिलीवरी के साथ-साथ ऑपरेशन तक किए जाने के आरोप सामने आते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित स्टाफ और जरूरी चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में जच्चा-बच्चा की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है।
हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई ने भी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सलेमपुर कोन चौराहा स्थित न्यू सम्राट हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कमियाँ मिलने पर सील कर दिया था। वहीं जिले में अन्य अस्पतालों को नोटिस भी जारी किए गए थे और जवाब मांगा गया था।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही हैनोटिस के बाद आगे क्या हुआ? क्या संबंधित अस्पतालों ने विभाग को जवाब दिया? जवाब संतोषजनक था या नहीं? अगर जवाब संतोषजनक नहीं था तो आगे क्या कार्रवाई हुई? और क्या स्वास्थ्य विभाग ने दोबारा मौके पर पहुंचकर यह जांच की कि नोटिस पाने वाले अस्पताल अब भी संचालित तो नहीं हो रहे? सिर्फ अस्पताल सील कर देना या नोटिस थमा देना पर्याप्त नहीं है।
जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग पूरे जिले में बिना पंजीकरण और मानकों के विपरीत संचालित अस्पतालों की सूची तैयार कर नियमित जांच करे और नियमों का उल्लंघन मिलने पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे। क्योंकि सवाल किसी एक अस्पताल का नहीं, लोगों की जिंदगी का है। अगर बिना योग्य चिकित्सकीय व्यवस्था के प्रसव और ऑपरेशन जैसे गंभीर मामले किए जा रहे हैं, तो किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग को समय रहते सख्त कदम उठाने होंगे।
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि नोटिस की कार्रवाई के बाद अगला कदम क्या होगा?