शिक्षक दिवस विशेष: छात्राओं के दिलों में आज भी जीवित हैं शिक्षिका शमसा खातून की यादें
म्यूनिसिपल गर्ल्स इंटर कॉलेज की शिक्षिका ने छात्राओं में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास की जगाई अलख
बदायूं। शिक्षक केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी होता है। ऐसे ही शिक्षकों में शुमार थीं शमसा खातून, जिन्होंने म्यूनिसिपल गर्ल्स इंटर कॉलेज में शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं देते हुए छात्राओं के बीच शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास की भावना विकसित की। वर्ष 2013 में उनके निधन के बाद भी उनकी यादें आज तक उनके परिवार और उन्हें पढ़ने वाली छात्राओं के दिलों में जीवित हैं।
शमसा खातून का शिक्षण कार्य केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं था। वह छात्राओं को पढ़ाई के साथ जीवन में आगे बढ़ने, मेहनत करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित करती थीं। उनके सहज और स्नेहपूर्ण व्यवहार के कारण छात्राएं उनसे विशेष लगाव रखती थीं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह अपनी छात्राओं के साथ आत्मीयता से पेश आती थीं। यही कारण था कि छात्राएं उन्हें केवल अपनी शिक्षिका के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी मार्गदर्शक के रूप में देखती थीं, जिनसे वे अपनी परेशानियां और मन की बातें भी साझा कर सकती थीं। छात्राओं का उनके प्रति प्रेम और सम्मान उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान बना। समय बीतता गया, विद्यालय की पीढ़ियां बदलती रहीं और नई छात्राएं शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ती रहीं, लेकिन शमसा खातून से पढ़ने वाली छात्राओं के लिए उनकी यादें आज भी विशेष हैं। उनके द्वारा दी गई सीख और स्नेह उन छात्राओं के जीवन का हिस्सा बना रहा।
शिक्षक दिवस के अवसर पर जब समाज अपने गुरुजनों के योगदान को याद करता है, ऐसे में शमसा खातून जैसी शिक्षिकाओं को स्मरण करना उस परंपरा को सम्मान देना है, जिसमें एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने के लिए अपना जीवन समर्पित करता है। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं, उनका स्नेह और छात्राओं के दिलों में बसी उनकी यादें उन्हें हमेशा जीवित रखेंगी। यही एक शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है कि उसके जाने के वर्षों बाद भी उसके विद्यार्थी उसे सम्मान और प्रेम के साथ याद करें। शिक्षण के क्षेत्र में शमसा खातून के योगदान, छात्राओं के प्रति उनके स्नेह और उनके द्वारा दी गई सीख को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। उनका जीवन और शिक्षण सेवा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहे, यही शिक्षक दिवस पर उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले शारिक नसीर वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के बदायूं ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ और तथ्यपरक कवरेज के साथ वह लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
