पत्रकार दिलीप सिन्हा की मृत्यु का मामला पहुंचा राष्ट्रीय स्तर पर
लखनऊ। वरिष्ठ एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार दिलीप सिन्हा की यूपीएसआरटीसी बस से हुई मृत्यु के मामले को अब राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। इस प्रकरण में विधिक अधिकार कार्यकर्ता (Legal Rights Activist) संजय शर्मा द्वारा लगातार की जा रही कानूनी पहल के बाद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संजय शर्मा से विस्तृत अभ्यावेदन एवं साक्ष्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी पत्रों के अनुसार, संजय शर्मा की शिकायतों में यह उल्लेख किया गया है कि दिवंगत पत्रकार दिलीप सिन्हा द्वारा सूचना विभाग सहित विभिन्न मंचों पर की गई शिकायतों तथा उनके बाद उत्पन्न परिस्थितियों से प्रथम दृष्टया पत्रकार उत्पीड़न (Harassment) तथा प्रेस की स्वतंत्रता के दमन (Suppression of Press Freedom) का प्रश्न सामने आता है। इसी आधार पर परिषद ने विस्तृत तथ्यों एवं सहायक दस्तावेजों के साथ अभ्यावेदन प्रस्तुत करने को कहा है ताकि मामले की विधिसम्मत जांच आगे बढ़ाई जा सके।
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सिन्हा की लखनऊ के जियामऊ क्षेत्र में एक यूपीएसआरटीसी बस की टक्कर से मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने पत्रकार जगत में गहरा शोक और चिंता उत्पन्न की थी।
संजय शर्मा ने शुरू किया साक्ष्य संकलन अभियान
संजय शर्मा ने अब इस मामले में व्यापक साक्ष्य एकत्र करने का अभियान प्रारंभ किया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि दिवंगत पत्रकार दिलीप सिन्हा के परिवारजन, उनके साथ कार्य कर चुके सहयोगी पत्रकार, उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन एवं पत्रकार यूनियनें, यदि उनके पास दिलीप सिन्हा द्वारा पूर्व में किए गए किसी उत्पीड़न संबंधी पत्राचार, शिकायतें, ई-मेल, ज्ञापन, विभागीय अभिलेख, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयान अथवा अन्य कोई दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें संजय शर्मा को उपलब्ध कराएं।
संजय शर्मा का कहना है कि प्राप्त समस्त साक्ष्यों का विधिक परीक्षण कर उन्हें प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया सहित अन्य सक्षम केंद्रीय प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि यदि किसी प्रकार का संस्थागत उत्पीड़न अथवा प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हो तो उसकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
परिवार को मुआवजा दिलाने का भी अभियान
संजय शर्मा ने यह भी बताया कि उन्होंने दिवंगत पत्रकार दिलीप सिन्हा के परिवार को आर्थिक सहायता एवं सरकारी मुआवजा दिलाने का भी दायित्व अपने स्तर पर उठाया है। उनके अनुसार, इस संबंध में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तथा परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा परिवार को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। अब वे उस आश्वासन के अनुपालन के लिए संबंधित विभागों के समक्ष आवश्यक अभ्यावेदन, दस्तावेज एवं पत्राचार कर रहे हैं ताकि परिवार को विधिसम्मत आर्थिक सहायता प्राप्त हो सके।
पत्रकार सुरक्षा पर उठे गंभीर प्रश्न
मीडिया जगत के अनेक सदस्यों का मानना है कि यदि किसी पत्रकार द्वारा लगातार सार्वजनिक हित के मुद्दे उठाने के बाद उसे संस्थागत प्रताड़ना का सामना करना पड़ा हो, तो ऐसे प्रत्येक आरोप की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच लोकतांत्रिक व्यवस्था की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। प्रेस की स्वतंत्रता संविधान के मूल लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा विषय है और किसी भी प्रकार के कथित उत्पीड़न के आरोपों की निष्पक्ष जांच सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
संजय शर्मा ने कहा कि उनका उद्देश्य उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष रखना है ताकि दिवंगत
पत्रकार दिलीप सिन्हा के परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में किसी भी पत्रकार को यदि उत्पीड़न का सामना करना पड़े तो उसके लिए प्रभावी संस्थागत संरक्षण सुनिश्चित हो।
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