असम बाढ़ की मार: टूटे बांध पर रह रहा किसान बोला-‘मैं 10 साल पीछे चला गया’
असम में जांजी नदी के बांध टूटने से भारी तबाही
- किसानों की जमीन, जानवर, घरेलू सामान से लेकर सब कुछ बह गया
जोरहाट (असम)। उपरी असम के जोरहाट जिलांतर्गत टियक में बाढ़ का प्रकोप कुछ हद तक कम हुआ है लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई बाढ़ प्रभावित लोग अब भी बांध और अस्थायी आश्रय स्थल में दिन बिताने के लिए मजबूर हैं।
दूसरी तरफ, धनतुला इलाके में जांजी नदी के बांध का टूटा हुआ हिस्सा अब भी चिंता का कारण बना हुआ है। बाढ़ के समय इस टूटे हुए हिस्से से जांजी नदी का पानी भारी नुकसान पहुंचा चुका है। किसानों की जमीन, जानवर, घरेलू सामान, सब कुछ पहले ही बाढ़ के पानी में बह गया है।
इस बीच धनतुला इलाके में जांजी नदी के बांध के टूटे हुए हिस्से पर अपने परिवार के साथ आश्रय लेने वाले एक किसान ने बुधवार काे मीडिया के साथ अपनी पीड़ा को बयां करते हुए रोने लगा। उसने बताया है कि इस बार की बाढ़ ने उसे 10 वर्ष पीछे कर दिया है। उसका पूरा घर, मवेशी, सामान सभी कुछ बाढ़ के पानी में बह गया।
अचानक आई बाढ़ की विभिषिका को याद करते हुए किसान ने कहा कि बांध के टूटने के साथ ही घर में पानी तेजी से प्रवेश कर गया, घर से कुछ भी सामान निकालने तक का मौका नहीं मिल पाया। बड़ी मुश्किल से एक बेड, कुछ कपड़े, रसोई गैस, बकरिया, बत्तख आदि सामान ही घर से निकालकर बांध पर पहुंचा पाया। घटना को याद कर दिल में जब पीड़ा अधिक होने लगती तो वह आसमान की ओर देखकर अपनी बेचारगी को छुपाने की कोशिश करता नजर आया। इस तरह की स्थिति बाढ़ प्रभावित अन्य ग्रामिणों की भी देखने को मिल रही है।
लोगों के अनुसार जलसंसाधन विभाग और ठेकेदार की अनदेखी की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है। इसलिए, सरकार ने लंबी अवधि की योजना के तहत आधुनिक तकनीक से इस पूरे बांध का जल्द से जल्द मरम्मत करने और लोगों के जीवन को स्थिर करने की अपील की है। हालांकि, लोगों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से पहले ही खाद्य सामग्री की आपूर्ति की जा रही है, फिर भी यह वर्तमान में पर्याप्त नहीं है।
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
