सिंचाई विभाग नहर निर्माण के लिए कर रहा कौड़ियों के भाव जमीन का अधिग्रहण, किसानों में भारी आक्रोश
विस्थापितों की तर्ज पर पुनर्वास पैकेज व अन्य सुविधाओं की मांग-
रमेश यादव
दुद्धी (सोनभद्र)। कनहर बांध अमवार से निकलने वाली नहर के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग द्वारा किसानों की जमीनों का बैनामा कराने का काम तेजी से चल रहा है,लेकिन विभाग द्वारा तय की गई मुआवजा राशि को लेकर क्षेत्र के किसानों में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग उनकी कीमती जमीनों को कृषि दर पर लेकर कौड़ियों के भाव अधिग्रहित कर रहा है।सिंचाई विभाग द्वारा नहर के लिए जमीन अधिग्रहण की दर मात्र 11 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है।आज के समय में जमीन की बाजार दर (मार्केट वैल्यू) इससे कहीं अधिक है। किसानों का कहना है कि इस मामूली रकम से वे भविष्य में अपने परिवार के लिए दूसरी जमीन भी नहीं खरीद पाएंगे। कम मुआवजे के कारण किसानों के सामने अपनी आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
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विस्थापितों की तर्ज पर पुनर्वास पैकेज की मांग-
किसानों ने सिंचाई विभाग की इस नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों का कहना है कि जब कनहर बांध के मुख्य विस्थापितों को सरकार द्वारा तीन पीढ़ियों तक का 7 लाख 11 हजार रूपये पुनर्वास पैकेज और अन्य सुविधाएं दी जा सकती हैं, तो नहर निर्माण के लिए जमीन देने वाले किसानों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? नहर के प्रभावित किसान हीरालाल, उमेश, रामलाल, सूरज सहित तमाम किसानों ने भी मांग की है कि उन्हें मुख्य विस्थापितों की तर्ज पर ही सम्मानजनक मुआवजा और पुनर्वास पैकेज दिया जाए।
इस संबंध सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन के आदेशानुसार नहर के लिए किसानों से जमीन अधिग्रहण की जा रही है।
