वर्तमान समय में योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में भारत के पीएम मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका:आचार्य प्रमोद कृष्णम्

रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय में द्वितीय योगोत्सव–2026 के अंतर्गत संगोष्ठी एवं विशेष प्रदर्शनी का आयोजन

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मुजाहिद खां

रामपुर:शुक्रवार 19 जून को रामपुर रज़ा पुस्तकालय में द्वितीय योगोत्सव–2026 के अंतर्गत योग:एक वैश्विक आन्दोलन विषय पर एक संगोष्ठी तथा योग यात्रा:शास्त्र,साधना एवं संस्कार  विषयक विशेष प्रदर्शनी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।इसी के साथ तीन दिवसीय योगोत्सव–2026 कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया तत्पश्चात राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. पुष्कर मिश्र,निदेशक,रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय द्वारा की गयी।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री श्री 1008 श्रीमद्जगद्गुरु श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज रहे।

इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि योग भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है,जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वास्थ्य,संतुलन और आध्यात्मिक उन्नयन का मार्ग प्रदान किया है।रामपुर रज़ा पुस्तकालय भारतीय ज्ञान परम्परा,संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण और प्रसार के लिए निरन्तर कार्य कर रहा है तथा योग इसी ज्ञान परम्परा का महत्वपूर्ण अंग है।उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज के आगमन पर और उनके परिणाश्रुत भाषण के लिए उनका आभार व्यक्त किया।उन्होंने अन्य अतिथियों को भी उनके आगमन के लिए आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा महर्षि चरक ने लिखा है जिस प्रकार हर वनस्पति में औषधी है उसी प्रकार हर अक्षर में मंत्र है।उसी प्रकार उन्होंने इसको आगे बढ़ाते हुए कहा है जिस तरह हर अक्षर में मंत्र है,उसी प्रकार हर मनुष्य में ऋषि है और उसी अर्श्व तत्त्व को प्राप्त करना ही आश्रम परंपरा है।मन्त्रः द्रष्टारः ऋषिः,यानी ऋषि वह है जो द्रष्टा है और द्रष्टा वो है जो ना करता है,जो हो रहा है सो हो रहा हैं,केवल साक्षी है।इस साक्षित्व से जिस दिन मनुष्य एकात्म हो  जाता है वही योग है।भारतीय दर्शन में मोक्ष और साक्षित्व को लेकर कई धारणाएं हैं जैसे व्याकरण शास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति कहना चाहता है और उसको उसी प्रकार कह डाले यही मोक्ष है।न्याय दर्शन के अनुसार अपवर यानि दुविधाओं से मुक्त होकर किसी निर्णय पर पहुंच जाना मोक्ष है।

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अद्वैत वेदांत के अनुसार किसी भी प्रकार के द्वैत से मुक्त होकर अद्वैत में स्थित हो जाना मोक्ष है।भक्ति मार्ग के अनुसार भक्त का भगवान में एकाकार हो जाना मोक्ष है।सभी प्रकार के द्वैत का युक्त होकर अद्वैत हो जाना ही योग है।जब हम जो कहना चाहते है उसको बिना किसी बाधा के वैसे ही कह ले जाते हैं यही  योग हैं।जब भक्त और भगवान का शिष्य और आचार्य का अभेद हो जाता है वही योग है।आश्रम में कहते हैं जहां शिष्य आचार्य हो जाता है और आचार्य शिष्य हो जाता वही आश्रम है वही योग है।अभेद की स्थिति तभी होगी जब न करता न अकर्ता जो है सो है दृष्टा होकर व्यक्ति देखता है तब इस स्थिति कि अनुभूति होती है जहां किसी प्रकार का भेद नहीं होता।उन्होंने कहा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मानाने  का श्रेय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है।वो स्वयं योगाभ्यासी हैं।वैश्विक आन्दोलन का एक पक्ष आचार्य श्री ने बड़े सुन्दर ढंग से रखा कि किस प्रकार आज सम्पूर्ण धरा में 21 जून को योग दिवस मनाया जा रहा है जो वर्ल्ड रिकॉर्ड में आने वाला है यही वह वैश्विक आन्दोलन है जिसकी हम बात कर रहे हैं।योग को वैश्विक आंदोलन बनाने में या होने में बहुत सी विभूतियों की भूमिका रही है,आचार्य श्री ने उन सबके नाम लिए चाहे वो स्वामी विवेकानंद रहे हो परमहंस योगानंद रहे हो अयंगर साहब रहे हो स्वयं स्वामी रामदेव ने भी इसमें काफी अधिक काम किया,यह सब योग को वैश्विक धरा पर लेकर गएमइसका उद्देश्य क्या था क्यों हम पृथ्वी को समस्त मानव के समक्ष योग को ले जा रहे हैं दिखा रहे हैं तो ऋग्वेद में एक मंत्र है,“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः”,जिसका अर्थ है कि सद्विचार पृथ्वी पर जहां भी जिसरूप में जैसे हैं वह हम तक आए।“पृथिव्यां सर्वमानवः” यानि कि पृथ्वी के प्रत्येक मनुष्य तक वह सद्विचार पहुंचाने का जो दायित्व है वह ऋषि महर्षि ने भरतवंशियों को सौंप दिया है।

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हजारों वर्ष पूर्व पृथ्वी के प्रत्येक मनुष्य जो जहां जिस रूप में है जैसा भी है बिना किसी भाषा भेद के बिना किसी मजहबी भेद के बिना किसी लिंग भेद के बिना किसी नस्ल भेद के बिना किसी भूभाग भेद के जो व्यक्ति जहां जिस रूप में जैसा है वहां से उसी रूप में वह परिष्कार को प्राप्त हो उत्कर्ष को प्राप्त हो।उसके अचार-विचार,व्यवहार-संस्कार में धर्म,नीति,न्याय,सत्य,मर्यादा,सदाचार उतरे यही योग है यही यौगिक क्रांति है जिसकी बात आचार्य श्री कर रहे हैं।क्रांति उसे कहते हैं जो व्यापक परिवर्तन ले आए।क्रांति की बात आचार्य श्री ने की थी और योग तो शांत करता है।जितना योग में प्रवेश बढ़ेगा उतना ही भीतर शांति में वृद्धि होती रहती है और यह शांति जो किसी हिमालय में कोई योगी बैठा है उसके भीतर वह शांति गहन होती जा रही है तो वह शांति वही नहीं ठहरती वह क्रांति के रूप में समस्त मानव के बीच में व्याप्त हो जाती है।यत पिंडे तत् ब्रह्मांडे कहा गया है जो पिंड में है वही ब्रह्माण्ड में है।महात्मा गांधी भी इस बात को मानते थे कि  अगर एक व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वराज्य को यानि कि अपने ऊपर विजय प्राप्त कर ले अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ले और गहन शांति की और निरंतर बढ़ता रहे उसके उस पिंड का प्रभाव संपूर्ण ब्रह्मांड पर पड़ता है यह आज क्वांटम फिजिक्स भी कह रही है Particle Entanglement के सिद्धांत के रूप में क्वांटम फिजिक्स ये तय नहीं कर पा रही है कि जो सबसे सूक्ष्म है वह पार्टिकल है कि वेव है।तो आज ज्ञान की प्रगति भी यह सिद्ध कर रही है कि संपूर्ण सृष्टि या ब्रह्मांड और कुछ नहीं योग है।

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मुख्य अतिथि पूज्य आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में योग को मानवता के कल्याण का सार्वभौमिक माध्यम बताते हुए कहा कि महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग,भारतीय दर्शन,सनातन संस्कृति तथा पौराणिक इतिहास के विविध आयामों पर संगोष्ठी में उपस्थित विद्वानों ने अत्यंत सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए हैं।उन्होंने कहा कि जिस मंच पर एक भी विद्वान विभूति उपस्थित हो,वह मंच गरिमामय बन जाता है,किन्तु इतनी बड़ी संख्या में विद्वानों और चिंतकों को एक मंच पर एकत्रित करना अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।इसके लिए उन्होंने रामपुर रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र की कार्यकुशलता,संगठन क्षमता एवं वैचारिक नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें साधुवाद दिया।कहा कि योग के विषय में आज विश्वभर में चर्चा हो रही है।विभिन्न संचार माध्यमों,सामाजिक मंचों तथा सार्वजनिक स्थलों पर योग के प्रति लोगों की रुचि निरंतर बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि योग पर आधारित अनेक ग्रंथ,जैसे योग उपनिषद्,योग वशिष्ठ,पतंजलि योगसूत्र तथा योगभाष्य आदि भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं,जिनमें योग के गहन सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन मिलता है।कहा कि सृष्टि का सृजन स्वयं योग का ही स्वरूप है।भारतीय परंपरा में भगवान शिव को आदियोगी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।महर्षि व्यास,महर्षि वशिष्ठ,योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण,स्वामी शिवानन्द,महर्षि महेश योगी,बी.के.एस. अयंगर तथा परमहंस योगानन्द सहित अनेक महापुरुषों ने अपने-अपने ढंग से योग की व्याख्या कर मानव समाज का मार्गदर्शन किया है।कहा कि महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग-यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा,ध्यान एवं समाधि—मानव जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय के ऐतिहासिक सभागार में इस प्रकार के आयोजन का होना स्वयं इस बात का प्रमाण है कि भारतीय ज्ञान परंपरा और योग आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं। कहा कि शांति के लिए जितना योग आवश्यक है,उतना ही परिवर्तन और सकारात्मक क्रांति के लिए भी योग आवश्यक है।उन्होंने कहा कि जीवन,प्रकृति,समाज और राष्ट्र के साथ योग का गहरा संबंध है तथा योग के बिना किसी भी प्रकार का स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है।कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने हजारों वर्ष पूर्व सम्पूर्ण विश्व को योग का दर्शन प्रदान किया था तथा वर्तमान समय में योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप आज विश्व के अनेक देशों में योग को व्यापक स्वीकृति प्राप्त हुई है।उन्होंने कहा कि 21 जून को सम्पूर्ण विश्व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाता है,जो भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के वैश्विक सम्मान का प्रतीक है।अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय में योग विषयक संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी का आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है,जिसका श्रेय पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र एवं उनकी टीम को जाता है।

संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता प्रो. सुरेन्द्र कुमार त्यागी,पूर्व प्रमुख,योग विज्ञान विभाग,गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय,हरिद्वार ने कहा कि शास्त्र के अनुसार यदि आपने योग सिद्ध कर लिया,तो दुःखों की आत्यंतिक निवृत्ति हो जाती है।आत्यंतिक निवृत्ति उसे कहते हैं,जब दुःख लौटकर दोबारा कभी नहीं आता।उन्होंने मनुष्य के दुःखों के कारणों पर अपने विचार रखे।उन्होंने कहा कि बार-बार जीवन में दुःखों के आने का कारण हमारा योग को सही रूप से धारण न करना है।उन्होंने कहा कि योग केवल दिन में कुछ समय का अभ्यास करना नहीं है,बल्कि यह निरंतर चलने वाली क्रिया है।जब से हमारी आँखें खुलती हैं और रात को बिस्तर पर जाने तक हमारा जीवन योगमय रहता है,तभी हम योग का सच्चा लाभ उठा सकते हैं।उन्होंने कहा कि सांख्य दर्शन के अनुसार योग से ही यह सृष्टि पैदा हुई है,योग से ही यह सृष्टि चल रही है और योग के लिए ही चल रही है। उन्होंने योग का सरल अर्थ लोगों को समझाया।उन्होंने कहा कि योग का अर्थ है ‘जोड़’।जो चीज हमें परमात्मा से मिलाए,वही योग हैइस अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान,नई दिल्ली की वरिष्ठ योग प्रशिक्षक डॉ. नम्रता राज ने वैश्विक आंदोलन के रूप में योग का इतिहास एवं विकास विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीनतम ज्ञान परम्पराओं में से एक है,जिसकी उत्पत्ति हजारों वर्ष पूर्व भारतीय सभ्यता में हुई।आज योग ने राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर सम्पूर्ण विश्व में स्वास्थ्य,संतुलन और आध्यात्मिक जागरूकता का एक व्यापक आन्दोलन का रूप धारण कर लिया है।उन्होंने बताया कि योग का उल्लेख वेदों,उपनिषदों,भगवद्गीता तथा महर्षि पतंजलि के योगसूत्रों में मिलता है।योग का विकास प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक विभिन्न चरणों से होकर हुआ है,जिसमें वैदिक परम्परा,पतंजलि का अष्टांग योग,हठयोग तथा आधुनिक योग आन्दोलन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करते हुए अष्टांग योग के माध्यम से आत्मानुशासन और आत्मबोध का मार्ग प्रशस्त किया।आधुनिक युग में स्वामी विवेकानन्द,स्वामी शिवानन्द,टी. कृष्णमाचार्य तथा अन्य महान योगाचार्यों ने योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए प्रस्ताव के फलस्वरूप वर्ष 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त हुई,जिसके बाद योग विश्वव्यापी जनआन्दोलन बन गया।

संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान,नई दिल्ली की सहायक प्रोफेसर डॉ. निकिता शर्मा ने योग द्वारा तनाव प्रबंधन विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनाव 21वीं सदी की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुका है,जो मानसिक,शारीरिक तथा सामाजिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।उन्होंने बताया कि तनाव केवल मन की अवस्था नहीं है,बल्कि यह शरीर में होने वाले अनेक जैव-रासायनिक परिवर्तनों से भी जुड़ा हुआ है।कहा कि कार्यस्थल का दबाव,पारिवारिक एवं आर्थिक समस्याएँ,नकारात्मक सोच,अनियमित दिनचर्या,अपर्याप्त नींद तथा अत्यधिक तकनीकी निर्भरता तनाव के प्रमुख कारण हैं।उन्होंने बताया कि लगातार तनाव रहने से उच्च रक्तचाप,मधुमेह,हृदय रोग,चिंता,अवसाद तथा सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में तनाव प्रबंधन के लिए औषधियों,परामर्श एवं मनोचिकित्सा का उपयोग किया जाता है,किन्तु योग एक समग्र एवं प्राकृतिक समाधान प्रदान करता है। योग शरीर,मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित कर व्यक्ति को आंतरिक शांति एवं स्थिरता प्रदान करता है।

संगोष्ठी के समापन के पश्चात पुस्तकालय के दरबार हॉल में “योग यात्रा:शास्त्र,साधना एवं संस्कार” विषयक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि आचार्य श्री प्रमोद कृष्णम् जी महाराज द्वारा किया गया।प्रदर्शनी में योग की प्राचीन परंपरा,भारतीय ज्ञान-संपदा,योग दर्शन,योग साधना तथा योग से संबंधित दुर्लभ चित्रों एवं संदर्भ सामग्री को प्रदर्शित किया गया।प्रदर्शनी के माध्यम से योग की ऐतिहासिक,सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाया गया।इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सूर्यप्रकाश पाल,भारत भूषण गुप्ता,स्वामी हरमनोज दास जी,स्वामी विट्ठलानन्द जी महाराज,योगेन्द्र त्यागी,नितिन त्यागी,शिवम त्यागी,रमेश कुमार जैन,डॉ. मेहंदी हसन,डॉ. सैयद अनवरुल हसन,श्रीमती अनीता वैश्य,सुश्री अंतरा यादव,डॉ. ज़हीर अली सिद्दीकी,डॉ. किश्वर सुल्ताना सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक,विद्वान,शोधार्थी एवं योग प्रेमी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री आस्था भारती झा द्वारा किया गया।समारोह के अंत में सभी अतिथियों,वक्ताओं एवं उपस्थित प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

लेखक के बारे में

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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।

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