यूपी पुलिस की उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक, ई-साक्ष्य और लंबित मामलों के निस्तारण पर डीजीपी के सख्त निर्देश

—ई-साक्ष्य को बताया “विवेचना की आत्मा”, ई-समन बढ़ाने, 60-90 दिन से लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण और जेडएफडी योजना के विस्तार पर जोर

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—अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था एवं आगामी त्यौहारों की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गयी

लखनऊ। डीजीपी राजीव कृष्ण द्वारा पुलिस मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ऑनलाइन माध्यम से प्रदेश के सभी जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, रेंज स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों, एसएसपी/एसपी, एएसपी और क्षेत्राधिकारियों के साथ की गई। बैठक में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, लंबित विवेचनाओं के निस्तारण, डिजिटल पुलिसिंग और आगामी त्योहारों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

 डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य  विवेचना की आत्मा है, इसलिए इसकी गुणवत्ता और सही तरीके से संकलन पर विशेष ध्यान दिया जाए। डीजीपी ने यह भी बताया कि जनवरी 2028 से नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद ई-साक्ष्य अनिवार्य हो जाएगा, इसलिए सभी विवेचकों को इसके लिए प्रशिक्षित और तैयार किया जाना जरूरी है। बैठक में ई-सम्मन के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। वर्तमान में इसका उपयोग लगभग 28 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिसे और बढ़ाने के निर्देश दिए गए ताकि न्यायिक प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सके। 

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आईजीआरएस शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण पर भी विशेष बल दिया गया, ताकि आम जनता का पुलिस पर भरोसा मजबूत हो। इसके साथ ही 60 और 90 दिन से अधिक लंबित विवेचनाओं को तीन माह के विशेष अभियान के तहत तेजी से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए।

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अपराधियों की निगरानी के लिए ‘यक्ष ऐप’ के प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा हुई। इसके माध्यम से सक्रिय और आदतन अपराधियों की सतत निगरानी और सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा गया। सड़क सुरक्षा को लेकर ज़ीरो फेटलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिन जिलों में यह लागू है, वहां सड़क दुर्घटनाओं में 10 से 12 प्रतिशत की कमी आई है। इस सफलता को देखते हुए अतिरिक्त 100 संवेदनशील थानों को भी इस योजना में शामिल करने के निर्देश दिए गए। 

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इसके अलावा महिला अपराध, गो-तस्करी, गोकशी और अवैध धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामलों पर भी सख्त कार्रवाई और त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए। सभी अधिकारियों को सीयूजी मोबाइल सक्रिय रखने और जनता, मीडिया तथा जनप्रतिनिधियों से बेहतर संवाद बनाए रखने के लिए भी कहा गया।अंत में डीजीपी ने सभी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।

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