तेरस पर दुःखहरण नाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
राप्ती जल से हुआ भोलेनाथ का अभिषेक
मोहम्मद अय्यूब
उतरौला (बलरामपुर)। श्रावण मास की शिवरात्रि यानी तेरस के पावन अवसर पर नगर के प्राचीन श्री दुःखहरण नाथ मंदिर में सोमवार को भोर से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह करीब चार बजे से ही मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन, पूजन और जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लग गया। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से मंदिर परिसर एवं आसपास का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
तेरस पर्व पर शिवभक्तों ने परंपरागत रूप से कांवड़ यात्रा निकाली। श्रद्धालुओं के अलग-अलग जत्थे मंदिर से रवाना होकर पिपरा घाट और सिंगारजोत घाट पहुंचे। सिंगारजोत घाट से ग्रामसभा मटेरिया-कर्मा क्षेत्र तथा पिपरा घाट स्थित राप्ती नदी से श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरा। इसके बाद कांवड़िये निर्धारित मार्गों से पैदल यात्रा करते हुए वापस श्री दुःखहरण नाथ मंदिर पहुंचे और भगवान शिव के शिवलिंग पर राप्ती नदी के पवित्र जल से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
कांवड़ियों के मंदिर पहुंचने पर श्री दुःखहरण नाथ मंदिर के महंत मयंक गिरि, उत्तराधिकारी सानू गिरि तथा मुख्य पुजारी अरुण गिरि सहित मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए जलपान की भी व्यवस्था की गई, जिससे यात्रा के दौरान उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पर्व को सकुशल एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए मंदिर समिति के सदस्यों ने पूरे मनोयोग से श्रमदान किया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने, दर्शन-पूजन में सुविधा देने और कांवड़ियों के आवागमन को सुचारू बनाए रखने के लिए मंदिर व्यवस्था समिति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिला एवं पुरुष पुलिस आरक्षियों तथा नगर पालिका परिषद उतरौला के सफाई कर्मचारियों ने भी व्यवस्था में सहयोग किया।
इस अवसर पर मंदिर के महंत मयंक गिरि जी महाराज ने श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि और तेरस के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक करने और श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और सामूहिक भक्ति की भावना को भी मजबूत करती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक आयोजनों के दौरान आपसी सौहार्द बनाए रखने, स्वच्छता का ध्यान रखने और प्रशासन एवं मंदिर समिति द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन करने की अपील की। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर और कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही। भक्ति गीतों, हर-हर महादेव के जयघोष और बोल बम के उद्घोष से वातावरण शिवमय रहा। दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान दुःखहरण नाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे।
कार्यक्रम के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन के बाद महंत मयंक गिरि जी महाराज ने मंदिर समिति, स्वयंसेवकों, पुलिसकर्मियों, नगर पालिका कर्मचारियों और सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने तेरस पर्व को सकुशल संपन्न कराने में सहयोग देने वाले सभी लोगों की सराहना की। कार्यक्रम में मंदिर समिति के व्यवस्थापक मोनू गुप्ता, आर्यन गुप्ता और अर्पित गुप्ता सहित अनेक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
