पीजीआई: द ब्राउन हार्ट पर चर्चा
— हमारा दिल हमारी आदतों का आईना: प्रो. आर.के. धीमन
लखनऊ। भारतीयों में कम उम्र में होने वाली दिल की बीमारियों का बढ़ता बोझ लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में चर्चा का मुख्य विषय रहा, जब ह्रदय रोग विशेषज्ञ, फिल्म निर्माता और पीजीआई का नेतृत्व एक दिलचस्प सत्र के लिए इकट्ठा हुए, जिसका शीर्षक था: दिल से दिल की बात: एशियाई भारतीयों के दिल को समझना।"
सत्र में जाने-माने फिजिशियन-फिल्म निर्माता डॉ. निर्मल जोशी और डॉ. रेनू जोशी शामिल हुए। केजीएमयू के पूर्व छात्र रहे ये डॉक्टर, अब अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में रहते हैं। उन्होंने अपनी प्रशंसित डॉक्यूमेंट्री 'द ब्राउन हार्ट' को प्रदर्शित किया—यह एक दिलचस्प सफर है, जो यह पता लगाता है कि दक्षिण एशियाई लोगों में दिल के दौरे कम उम्र में, ज़्यादा बार और अक्सर ज़्यादा गंभीर क्यों होते हैं।
पीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आदित्य कपूर ने कहा कि दिल से जुड़ी बातचीत "ज़्यादा बार, ज़्यादा खुलकर और बहुत पहले" होनी चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि विज्ञान, असल ज़िंदगी के अनुभवों और कहानी कहने की कला को एक साथ लाने से दिल की बीमारियों से जुड़ी जटिल बातों को आसानी से समझा जा सकता है और उन पर अमल किया जा सकता है।
डॉ. रूपाली खन्ना, जो 'द ब्राउन हार्ट' में भी शामिल रही हैं, ने महिलाओं में दिल की बीमारी के अक्सर नज़रअंदाज़ किए जाने वाले बोझ पर रोशनी डाली। उन्होंने लक्षणों को पहचानने, जोखिम के कारणों को समझने और गलतफहमियों को दूर करने के महत्व पर ज़ोर दिया, क्योंकि ये चीज़ें बीमारी का पता लगाने और इलाज में देरी का कारण बन सकती हैं।
संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने कहा कि "सेहत कोई लग्जरी नहीं, बल्कि रोजाना का चुनाव है," और इस बात पर ज़ोर दिया कि दिल की बीमारियों के बदलते हालात को देखते हुए जीवनशैली पर गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक जगह बैठे रहने की आदत, घंटों स्क्रीन के सामने बिताना, फास्ट फूड खाना, प्रोसेस्ड डाइट लेना, एक्सरसाइज न करना और बढ़ता तनाव आज की युवा पीढ़ी की ज़िंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमारा दिल हमारी आदतों का आईना है — आदत बदलो, दिल बदलो," और युवाओं से एक्टिव और जागरूक जीवनशैली अपनाने की अपील की।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
