कौशल प्रमाणपत्र अब डिजीलॉकर पर
लखनऊ । कौशल विकास मिशन से प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को अब अपने कौशल प्रमाणपत्र के लिए कागजी दस्तावेजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मिशन ने नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी और डिजीलॉकर की व्यवस्था से अपना एकीकरण पूरा कर लिया है। अब प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को उनके कौशल प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में उपलब्ध हो सकेंगे।
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि इस व्यवस्था से प्रमाणपत्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखा जाएगा। अभ्यर्थी अपने डिजीलॉकर अकाउंट के जरिए इन्हें कभी भी देख, डाउनलोड और जरूरत के अनुसार साझा कर सकेंगे। इससे प्रमाणपत्र के खोने, खराब होने या उसके रखरखाव की समस्या नहीं रहेगी। इस पूरी प्रक्रिया को नेशनल ई-गवर्नेंस डिविजन और डिजिटल इंडिया कॉपोर्रेशन के सहयोग से पूरा किया गया है। इसके लिए संस्थागत पंजीकरण, डिजिटल प्रमाणपत्र की व्यवस्था, प्रमाणपत्रों के प्रारूप तैयार करने और अभ्यर्थियों के पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने का काम पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अब कंपनियों और एम्प्लायर्स के लिए अभ्यर्थियों के दावों और प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता जांचना आसान हो जाएगा। आॅनलाइन सत्यापन से नौकरी के दौरान डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में लगने वाला समय बचेगा और फर्जी या जाली प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि डिजिटल प्रमाणपत्र की सुविधा से प्रशिक्षित युवाओं को अपने कौशल का प्रमाण देश में कहीं भी आसानी से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे रोजगार की प्रक्रिया भी अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद हो सकेगी।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
