मितौली-खीरी,30 जून(तरुणमित्र)। मितौली तहसील क्षेत्र के चौगानपुर गांव निवासी आशीष शुक्ला पवन शुक्ला पुत्र मिथलेश शुक्ला का पट्टा 2008 में हुआ था लंबी न्यायिक लड़ाई कलेक्ट्रेट अपर आयुक्त उप जिलाधिकारी सहित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में भी मुकदमा जीतने के बाद आशीष कुमार अदालत के स्पष्ट आदेश के बाद भी 7 महीने से मितौली तहसील के चक्कर लगा रहे हैं कि दबंगों ने हमारी जमीन पर जो कब्जा किया है वह कब्जा मुक्त कराया जाए लेकिन प्रशासन कई बार मौके पर गया भी और जमीन कम होने का हवाला देकर पट्टा धारक को इधर-उधर की बातें समझा देता है।
जबकि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट उप जिला मजिस्ट्रेट लखीमपुर अश्विनी कुमार सिंह जी ने अपने आदेश में लिखा है कि तहसीलदार मितौली पुलिस बल के साथ जाकर पट्टा धारक की जमीन से कब्जा हटवा कर पट्टा धारक को कब्जा दिलवाएं लेकिन आखिर कौन सी ताकत है जो मितौली तहसील प्रशासन के कर्मचारियों को पट्टा धारक की जमीन कब्जा मुक्त करने में आड़े आ रही है समझ में नहीं आता।
मुख्यमंत्री के आदेशों की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ द्वारा भूमाफियाओं पर और पट्टा धारको की जमीन पर कब्जा करने वाले दबंग पर कार्रवाई करने के कई बार निर्देश जारी किए हैं लेकिन यह आदेश मितौली तहसील प्रशासन अपनी जेब में रख कर घूम रहा है आखिर स्पष्ट आदेश के बाद भी आशीष कुमार की जमीन क्यों कब्जा मुक्त नहीं हुई चार लेखपालों की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने फैसला दिया है और कब्जा धारकों पर तीन तीन हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया है स्वयं तहसीलदार ने अपनी आख्या में कहा है की जमीन पर अवैध कब्जा है लेकिन फिर भी अगर 7 महीने से अपनी जमीन पर कब्जा पाने के लिए कोई गरीब तहसील प्रशासन के चक्कर लगा रहा है तो कहीं ना कहीं अधिकारी और कर्मचारी जरूर सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं।
कहीं कब्जे दार दबँगो से साठ-गांठ तो नहीं तहसील प्रशासन के लोगों की
लगभग चार बार टीम जाकर मौके का मुयाना करके लौट आई लेकिन कब्जे धारक से कब्जा नहीं हटवा पाई क्या कहीं कब्जा करने वाले दबँगो से तहसील प्रशासन के लोगों की शाटगांठ तो नहीं हो गई आखिर अपने लेखपालों की रिपोर्ट और तहसीलदार की आख्या के बाद हुए आदेश को मानने को क्यों तैयार नहीं तहसील प्रशासन अदालत के आदेशों की क्यों धज्जिया उड़ने पर लगा है मितौली तहसील प्रशासन 7 महीने से अगर पट्टा धारक अदालत के आदेश के बाद भी तहसील प्रशासन के चक्कर लगा रहा है तो तहसील प्रशासन की ईमानदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा होता है।