ICRA रिपोर्ट में बेहतर रेटिंग, यूपी डिस्कॉम निजीकरण वापस लेने की मांग
इकरा (ICRA) रिपोर्ट में पावर सेक्टर की क्रेडिट मैट्रिक्स में सुधार एवं उत्तर प्रदेश में डिस्कॉम रेटिंग बेहतर होने के बाद पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने हाल ही में जारी इकरा (ICRA) की रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश के विद्युत क्षेत्र की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। इस परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों (Discoms) का प्रदर्शन विशेष रूप से सराहनीय रहा है।

संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि इकरा की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश ने बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने के लिए दीर्घकालिक विद्युत क्रय समझौतों (Long-Term PPAs) के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है, जो ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रिपोर्ट के अनुसार देशभर में डिस्कॉम्स की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार के पीछे बेहतर संचालन, भुगतान अनुशासन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उत्तर प्रदेश के डिस्कॉम्स ने भी इन मानकों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी वित्तीय विश्वसनीयता को मजबूत किया है। इकरा की रिपोर्ट में प्रदेश के डिस्कॉम्स की रेटिंग मैट्रिक्स में भी सुधार दर्ज किया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि इकरा की रेटिंग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में पावर सेक्टर की रेटिंग मैट्रिक्स 5.2 हो गई है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में 3.4 तथा 2023-24 में 2.9 थी। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश और प्रदेश का विद्युत क्षेत्र निरंतर सुधार की दिशा में अग्रसर है।
संघर्ष समिति ने कहा कि इसी क्रम में केंद्र सरकार (ऊर्जा मंत्रालय/पीएफसी/आरईसी) द्वारा जारी रेटिंग में भी उत्तर प्रदेश के वितरण निगमों की स्थिति में सुधार हुआ है। विशेष रूप से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की रेटिंग में सुधार यह साबित करता है कि ये निगम अब बेहतर प्रदर्शन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिन निगमों को अब तक घाटे और अक्षमता का हवाला देकर निजीकरण के लिए चिन्हित किया गया था, उन्हीं निगमों की स्थिति में सुधार होना यह स्पष्ट करता है कि निजीकरण कोई अनिवार्य विकल्प नहीं है, बल्कि सुधारात्मक प्रयासों से ही व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था में तापीय (थर्मल) ऊर्जा का वर्चस्व होने तथा आपूर्ति लागत अधिक होने के बावजूद बिना टैरिफ वृद्धि के उपभोक्ताओं को निरंतर बिजली उपलब्ध कराना एक संतुलित एवं जिम्मेदार प्रदर्शन का परिचायक है।
इकरा रिपोर्ट जहां वित्तीय सुधार का संकेत देती है, वहीं सरकारी रेटिंग में परिचालन एवं सेवा गुणवत्ता में सुधार भी परिलक्षित हो रहा है। यह दोनों तथ्य मिलकर इस बात की पुष्टि करते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के वितरण निगम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि निजीकरण से उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की उपेक्षा होगी तथा कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इन सभी तथ्यों के आधार पर संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण का निर्णय तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि वितरण सुधार के लिए वित्तीय अनुशासन, लाइन लॉस में कमी तथा समय पर सब्सिडी भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यदि सरकार निजीकरण का निर्णय वापस लेती है, तो प्रदेश के बिजली कर्मी पूर्ण समर्पण और मनोयोग से कार्य करते हुए विद्युत व्यवस्था को देश के सर्वोत्तम वितरण तंत्रों में शामिल कर सकने में सक्षम हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
