पति के आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने पर कोर्ट ने दी तलाक मंजूरी
जयपुर। जयपुर मेट्रो-प्रथम की पारिवारिक न्यायालय मामलों की विशेष अदालत क्रम-1 ने एक फैसले में कहा कि क्रिमिनल केस की तथ्यों की जानकारी छिपाकर विवाह करना मानसिक क्रूरता है।
ऐसा करना भरोसे की नींव को नष्ट करने वाला है और मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। शादी के एक-दो दिन बाद ही पुलिस अप्रार्थी पति को गिरफ्तार कर ले गई, ऐसे में शादी के समय पत्नी को भ्रमित किया गया।
इससे उसके वैवाहिक जीवन की शुरुआत ही आघात व सामाजिक कलंक के साथ हुई। पीठासीन अधिकारी आरती भारद्वाज ने यह आदेश पत्नी की ओर से दायर तलाक याचिका को मंजूर करते हुए दिए।
मामले के अनुसार प्रार्थिया की शादी 30 अप्रैल, 2021 को जयपुर में हिन्दू रीति-रिवाज से अप्रार्थी के साथ हुई थी। विवाह के दो दिन बाद ही 2 मई को पुलिस उसके पति को किसी मामले में गिरफ्तार कर ले गई।
जिस पर प्रार्थिया ने पति के खिलाफ तलाक की अर्जी दायर कर कहा कि शादी से पहले ससुराल पक्ष ने अप्रार्थी के खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केस दर्ज होने व उसके चरित्र की जानकारी नहीं दी।
शादी के बाद उसे पता चला कि अप्रार्थी पति के खिलाफ ठगी व धोखाधड़ी के क्रिमिनल केस दर्ज हैं। कई केसों में चालान पेश हो चुका है और शादी से पहले व बाद में गिरफ्तार हुआ है।
इस शादी से वह खुद ठगा महसूस करती है। प्रार्थिया ससुराल में केवल एक ही दिन रही और इसके बाद पक्षकारों के बीच कोई वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं हुए हैं।
क्रिमिनल केसों की जानकारी छिपाकर शादी करना मानसिक क्रूरता है। इसलिए उसकी तलाक अर्जी मंजूर कर विवाह विच्छेद किया जाए।
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