संघ वार्ता से पहले समिति की बड़ी मांग, उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस ले प्रबंधन 

सार्थक वार्ता के लिए सकारात्मक वातावरण बनाना आवश्यक: संघर्ष समिति

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  • समिति का दावा: निगमों के 16 प्रमुख श्रम संघ एवं सेवा संगठन कार्यरत 

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को श्रम संघों एवं सेवा संगठनों के साथ वार्ता प्रारंभ करने से पहले आंदोलन के दौरान की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्थक एवं परिणामोन्मुख वार्ता के लिए विश्वास एवं सौहार्द का वातावरण आवश्यक है, जो उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस लिए बिना संभव नहीं है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि संविदाहीनता समाप्त करने की बात लगातार उठाए जाने के बाद अंततः पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने अगले सप्ताह कुछ श्रम संघों एवं सेवा संगठनों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। यह स्वागतयोग्य कदम है। हालांकि बेहतर होता कि प्रबंधन सीधे विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश से वार्ता करता, क्योंकि संघर्ष समिति के बैनर तले ऊर्जा निगमों के 16 प्रमुख श्रम संघ एवं सेवा संगठन कार्यरत हैं।

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संघर्ष समिति ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान सौहार्दपूर्ण वातावरण में होना चाहिए ताकि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके। इसके लिए आवश्यक है कि वार्ता से पहले सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयाँ वापस ली जाएँ।

संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों तथा दर्ज एफआईआर को वापस लेने के संबंध में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री माननीय श्री अरविंद कुमार शर्मा ने 19 मार्च 2023 को संघर्ष समिति के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में पावर कॉरपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस ली जाए। अत्यंत खेद का विषय है कि आज तक इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया और कोई भी कार्रवाई वापस नहीं ली गई।

संघर्ष समिति ने बताया कि मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप अनेक नियमित कर्मचारियों को निलंबित कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ की गई थी, जिन्हें आज तक समाप्त नहीं किया गया है। इससे संबंधित कर्मचारियों के सेवा संबंधी हित प्रभावित हो रहे हैं। जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनके सेवानिवृत्ति लाभ भी प्रभावित हो रहे हैं। दुर्भाग्यवश इनमें से कुछ कर्मचारियों का निधन भी हो चुका है, जिससे उनके परिवार अनावश्यक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

संघर्ष समिति ने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान हटाए गए लगभग 2400 अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मचारियों को भी आज तक सेवा में वापस नहीं लिया गया है। इसके अतिरिक्त नवंबर 2024 में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की घोषणा के बाद बड़े पैमाने पर कर्मचारियों का उत्पीड़न किया गया। वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पदों में कटौती की गई, संविदा कर्मचारियों को हटाया गया तथा यह प्रक्रिया आज भी जारी है।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि वार्ता केवल औपचारिकता या दिखावे के लिए नहीं होनी चाहिए। यदि प्रबंधन वास्तव में कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान चाहता है तो उसे वार्ता से पूर्व सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लेकर सकारात्मक वातावरण बनाना चाहिए। तभी सेवा संबंधी सभी मुद्दों पर सार्थक एवं परिणामकारी वार्ता संभव होगी।

 

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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