मझगांव कोर्ट बिल्डिंग और डेयरी में कथित धोखाधड़ी की जांच का आश्वासन!
सोशल एक्टिविस्ट संजय पंडित ने की न्यायिक जांच की मांग
By Rajesh Jaiswal
मुंबई। मुंबई के मझगांव कोर्ट बिल्डिंग और डेयरी परियोजना मामले में कथित गंभीर गड़बड़ियों और वित्तीय अनियमितताओं (सरकारी पैसे की बर्बादी) और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए सोशल एक्टिविस्ट संजय पंडित ने सरकार से न्यायिक जांच की मांग की थी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो वे सोमवार, (10 अगस्त 2026) से मुंबई के आजाद मैदान में सिर्फ पानी पीकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे। उनकी इस मांग पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को महाराष्ट्र सार्वजनिक बांधकाम विभाग के सचिव शरद राजभोज ने उक्त मामले की जांच कराने का मौखिक आश्वासन दिया है। वहीं, शिकायतकर्ता संजय पंडित ने बताया कि सेक्रेटरी राजभोज ने चीफ इंजीनियर श्रीमती प्रज्ञा वाल्के को जांच करके अगले आठ दिनों में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इससे पहले संजय पंडित ने कहा था कि उन्हें दी गई जानकारी के अनुसार, मझगांव कोर्ट बिल्डिंग और डेयरी मामले में गंभीर गड़बड़ियों, भ्रष्टाचार, सरकारी पैसे की बर्बादी और संदिग्ध डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल किया गया है। जिसके बारे में उन्होंने मुख्यमंत्री और सार्वजनिक बांधकाम विभाग समेत कई अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग भी की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर 10 अगस्त से पहले कोई लिखित और ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो वे आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर देंगे। हालांकि, सेक्रेटरी राजभोज ने इन सभी मांगों पर ध्यान देने के बाद जांच का मौखिक आश्वासन पहले ही दे दिया है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
मझगांव कोर्ट की मरम्मत और फर्नीचर की खरीद तथा उससे जुड़े लेन-देन में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। संजय पंडित के मुताबिक, सार्वजनिक बांधकाम विभाग ने ठेकेदार के संबंधित इंजीनियर के खिलाफ डी. एन. नगर पुलिस स्टेशन में फर्जी टेस्ट रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि कोर्ट प्रबंधक और संबंधित बांधकाम विभाग डिपार्टमेंट के अधिकारियों की मिलीभगत से उसी व्यक्ति की मदद से कोर्ट से जुड़े कथित फर्जी चालान तैयार करके भ्रष्टाचार किया गया। संजय पंडित ने सवाल उठाया है कि जिस तरह अब्दुल करीम तेलगी मामले में फर्जी स्टांप पेपर तैयार करके घोटाला किया गया था, उसी तरह क्या मझगांव कोर्ट मामले के लेन-देन में भी कथित फर्जी चालान के जरिए करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया गया है? उन्होंने मांग की थी कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, कोर्ट मैनेजर और संबंधित अधिकारियों के संदिग्ध भूमिका की जांच हो और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
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लेखक के बारे में
राजेश जायसवाल को पत्रकारिता क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव है। अपने लंबे करियर में उन्होंने समाचार लेखन और रिपोर्टिंग के विभिन्न दायित्व निभाए हैं। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में कार्यरत हैं।
