पुलिस ने 21 करोड़ साइबर ठगी मामले में मैकेनिकल इंजीनियर को किया गिरफ्तार
अन्य अंतरराज्यीय सदस्यों के बारे में मिले अहम सुराग
ग्वालियर। मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में ग्वालियर राज्य साइबर जोन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार की रात रतलाम से मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया है।
दो दिन पहले पुलिस ने शाजापुर के जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय उर्फ फौजी को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपियों में बैंक खाता धारक और एपीके फाइल के जरिए ओटीपी ऑटो-फॉरवर्ड करने वाला गिरोह का मुख्य हैंडलर शामिल है।
राज्य साइवर पुलिस के अनुसार, फरियादी सीनियर चार्टर्ट अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि व्हाट्सऐप के जरिए उनसे 'ट्रेडसीबियस' नाम के प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग में भारी रकम निवेश कराई गई।
जांच में सामने आया कि गिरोह ने निवेशकों को फंसाने के लिए 'ट्रेडसीबियस (Tradecboeus) नाम से एक पूरी तरह फर्जी वेब पोर्टल तैयार किया था।
इस फेक वेब पेज पर ट्रेडिंग का ग्राफ जानबूझकर घटता-बढ़ता दिखाया जाता था, जिससे निवेशकों को असली मुनाफा होने का झांसा मिलता रहे और वे अधिक से अधिक पैसा निवेश करते जाएं। यह पूरा वेब पेज विदेशी आईपी से कंट्रोल किया जा रहा था।
जालसाजों के झांसे में आकर अशोक विजयवर्गीय ने 21 करोड़ 05 लाख 92 हजार रुपये लगा दिए थे, लेकिन जब उन्होंने कैश निकालना चाहा तो उनसे इनकम टैक्स 10 करोड़ रुपये मांगे गए थे।
जिसके बाद उनको ठगी का अहसास हो गया था। यह मामला ग्वालियर राज्य साइबर जोन के पास आया था। इस मामले में दो आरोपी पुलिस ने पकड़े हैं।
दो दिन पहले मतलब बुधवार को पुलिस ने शाजापुर से जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय उर्फ जगदीश फौजी को पकड़ा था। क्योंकि जगदीश के अकाउंट में ठगी के 50 लाख रुपये आए थे।
जगदीश को पकड़ने के बाद खुलासा हुआ था कि उसने अपना अकाउंट रतलाम के अंकित वर्मा को कमीशन पर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने अंकित वर्मा को भी शुक्रवार रात को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपियों से पूछताछ में ठगी के बेहद चौंकाने वाले तरीके का खुलासा हुआ है। पकड़े गए आरोपियों ने कुबूल किया है कि वह किस तरह ठगी करने वाले गैंग के साथियों की मदद करते थे।
बताया गया कि आरोपी बिहार और मध्य प्रदेश में जाकर मोबाइल में एपीके फाइल एक्टिवेट करते थे। इसके बाद बैंकों से आने वाले सभी ओटीपी अपने आप ऑटो-फॉरवर्ड होकर मुख्य हैंडलर के पास पहुंच जाते थे।
गिरोह ने फरियादी के पैसे को अलग-अलग राज्यों के दर्जनों बैंक खातों में ट्रांसफर किया। आरोपी जगदीश का खाता देश के 6 अलग-अलग राज्यों के लोगों से ठगी करने में इस्तेमाल पाया गया है, जिसके बदले उसे हर ट्रांजेक्शन पर दो प्रतिशत कमीशन मिलता था।
साइबर पुलिस महानिरीक्षक शियाज ए. एवं पुलिस अधीक्षक प्रणय नागवंशी के मार्गदर्शन में निरीक्षक मुकेश नारोलिया की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घेराबंदी कर दोनों आरोपियों जगदीश मालवीय (41 वर्ष): निवासी ग्राम सिमरोल, शाजापुर, अंकित वर्मा (31 वर्ष): निवासी इंद्रानगर, रतलाम को पकड़ा।
जगदीश के बंधन बैंक के खाते में 50 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ था। यह पूरी रकम सीए से ठगी गई रकम थी। जबकि अंकिम मैकेनिकल इंजीनियर है और यह फर्जी बैंक खाते, सिम कलेक्शन और एपीके फाइल हैंडलिंग का काम संभालता था। गिरोह से जुड़े अन्य अंतरराज्यीय सदस्यों के बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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माही खान एक उभरती हुई कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए समाचार अपडेट का कार्य कर रही हैं। वह खबरों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देती हैं और मीडिया क्षेत्र में सीखते हुए अपने लेखन कौशल को लगातार विकसित कर रही हैं।
