34 साल का इंतजार खत्म: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय जूडो का ऐतिहासिक दिन, एक ही दिन में दो स्वर्ण और एक रजत पदक
अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने रचा इतिहास, यामिनी मौर्य ने जीता रजत; पहली बार जूडो में भारत ने एक संस्करण में दो गोल्ड अपने नाम किए
ग्लास्गो। स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय जूडो के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय बन गया। जिस खेल में भारत ने 1990 से लेकर 2022 तक एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीता था, उसी खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।
इस ऐतिहासिक सफलता की शुरुआत महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग से हुई, जहां अस्मिता डे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का पहला जूडो स्वर्ण पदक दिलाया। इसके कुछ ही मिनट बाद 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं यामिनी मौर्य ने महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर भारत के शानदार प्रदर्शन को और यादगार बना दिया।
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महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अस्मिता डे ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने बेहतरीन हिप थ्रो के जरिए बढ़त बनाई और फिर प्रतिद्वंद्वी को ओसाएकोमी-वाजा तकनीक से मैट पर मजबूती से नियंत्रित रखा। लगातार 20 सेकंड तक नियंत्रण बनाए रखने पर उन्हें इप्पोन मिला और मुकाबला तुरंत समाप्त हो गया। इसी जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं।
हर्ष सिंह बने पुरुष वर्ग के पहले भारतीय स्वर्ण विजेता
23 वर्षीय हर्ष सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार तकनीक और धैर्य का प्रदर्शन किया। उन्होंने शुरुआती मुकाबले में मलावी के चिकोंडी काथेवेरा को इप्पोन से हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में जगह बनाई।
फाइनल में उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष वरीय खिलाड़ी जोशुआ काट्ज़ से हुआ। मुकाबला काफी रोमांचक रहा और दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबे समय तक रणनीतिक संघर्ष चलता रहा। मैच खत्म होने में एक मिनट से भी कम समय बचा था, तभी हर्ष ने शानदार ताई-ओतोशी (Tai-otoshi) तकनीक का इस्तेमाल करते हुए प्रतिद्वंद्वी को मैट पर गिराया और निर्णायक वाजा-आरी हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने अपनी बढ़त कायम रखते हुए मुकाबला जीत लिया और कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष जूडो वर्ग का पहला भारतीय स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
यामिनी मौर्य ने जीता रजत
महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में यामिनी मौर्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि वह स्वर्ण से चूक गईं, लेकिन रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया।
34 साल बाद टूटा स्वर्ण का सूखा
भारत ने पहली बार 1990 में कॉमनवेल्थ गेम्स की जूडो प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। वर्ष 2022 तक भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 11 पदक (5 रजत और 6 कांस्य) जीते थे, लेकिन स्वर्ण पदक का इंतजार लगातार बना रहा।
ग्लास्गो 2026 में यह इंतजार शानदार अंदाज में समाप्त हुआ। भारत ने पहली बार किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स संस्करण में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर नया रिकॉर्ड कायम किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का जूडो प्रदर्शन
अवधि स्वर्ण रजत कांस्य कुल
1990–2022 0 5 6 11
ग्लास्गो 2026 2 1 0 3
कुल 2 6 6 14
ग्लास्गो 2026 में भारत के जूडो पदक विजेता
अस्मिता डे – महिला 48 किग्रा – स्वर्ण
हर्ष सिंह – पुरुष 60 किग्रा – स्वर्ण
यामिनी मौर्य – महिला 57 किग्रा – रजत
भारतीय जूडो के लिए यह उपलब्धि केवल तीन पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चले आ रहे स्वर्ण पदक के इंतजार के अंत का प्रतीक भी है। अस्मिता डे और हर्ष सिंह की ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय जूडो अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर केवल चुनौती देने ही नहीं, बल्कि चैंपियन बनने की क्षमता भी रखता है। यामिनी मौर्य के रजत पदक ने इस सफलता को और भी यादगार बना दिया।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
